बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सहायक मत्स्य अधिकारी भर्ती परीक्षा-2025 की पूरी चयन प्रक्रिया और परिणाम को निरस्त कर दिया है। अदालत ने भर्ती में गंभीर अनियमितताएं और अपने पूर्व आदेशों की अनदेखी पाए जाने पर राज्य सरकार को पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से नए सिरे से आयोजित करने के निर्देश दिए हैं।
मामले की शुरुआत वर्ष 2014 में सहायक मत्स्य अधिकारी के 8 पदों पर भर्ती से हुई थी। उस समय कई पात्र अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया था कि आवश्यक योग्यता होने के बावजूद उन्हें गलत तरीके से अपात्र घोषित कर दिया गया। मामला हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच तक पहुंचा, जहां राज्य सरकार को सभी अभ्यर्थियों के आवेदनों पर याचिकाकर्ताओं के साथ समान रूप से पुनर्विचार करने का निर्देश दिया गया था। हालांकि, विभाग ने सभी उम्मीदवारों का मूल्यांकन करने के बजाय केवल प्रतीक्षा सूची के एक अभ्यर्थी से तुलना कर प्रक्रिया पूरी कर दी।
सुनवाई के दौरान जस्टिस बिभु दत्ता गुरु की एकल पीठ ने कहा कि डिवीजन बेंच के आदेश का उद्देश्य सभी अभ्यर्थियों का निष्पक्ष और समान आधार पर तुलनात्मक मूल्यांकन करना था। केवल वेटिंग लिस्ट के एक उम्मीदवार से तुलना करना अदालत के आदेश का पालन नहीं माना जा सकता।
अदालत ने यह भी पाया कि भर्ती नियम, 2009 के अनुसार चयन समिति में केवल तीन सदस्य होने चाहिए थे, लेकिन विभाग ने नियमों के विपरीत पांच सदस्यीय समिति बनाकर साक्षात्कार आयोजित किए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब किसी कार्य की प्रक्रिया कानून में निर्धारित हो, तो उसका पालन उसी रूप में किया जाना अनिवार्य है। नियमों से हटकर अपनाई गई प्रक्रिया पूरी चयन प्रक्रिया को अवैध बना देती है।
इन सभी खामियों को गंभीर मानते हुए हाईकोर्ट ने 30 अप्रैल 2025 को जारी भर्ती परीक्षा का परिणाम और 19 मई 2025 को प्रकाशित चयन सूची दोनों को निरस्त कर दिया। साथ ही राज्य सरकार को नियमानुसार और पारदर्शी तरीके से भर्ती प्रक्रिया दोबारा संचालित करने के निर्देश दिए हैं।




