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    Home » विधानसभा में अविश्वास प्रस्ताव पर तीखी बहस, महंत ने गिनाईं सरकार की नाकामियां, चंद्राकर ने दिया करारा जवाब

    विधानसभा में अविश्वास प्रस्ताव पर तीखी बहस, महंत ने गिनाईं सरकार की नाकामियां, चंद्राकर ने दिया करारा जवाब

    Khabarwaad News DeskBy Khabarwaad News DeskJuly 17, 2026 छत्तीसगढ़ No Comments18 Mins Read

    रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के अंतिम दिन शुक्रवार को साय सरकार के खिलाफ कांग्रेस के अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा हुई। नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरण दास महंत ने 136 बिंदुओं का आरोप पत्र पेश करते हुए कहा कि ये सिर्फ मेरा आरोप, ये आम जनता का आरोप है। साय सरकार को अब तक 136 हफ्ते हो गए हैं. ये अविश्वास प्रस्ताव किसान, महिलाओं, युवाओं के खिलाफ रचे गए हर हफ्ते के षड्यंत्र का दस्तावेज है. हर हफ्ते का एक पाप, हर हफ्ते का एक धोखा, हर हफ्ते की नाकामी का पूरा दस्तावेज पेश कर रहे हैं।

    नेता प्रतिपक्ष डॉक्टर चरण दास महंत ने कहा कि 1963 में जब आचार्य जेपी कृपलानी ने नेहरू सरकार के विरुद्ध लोकसभा में पेश किया था, तब खुद नेहरू जी ने उसका स्वागत करते हुए कहा था कि सरकार के ख़िलाफ़ लोकतंत्र में ऐसी बहस होती रहे। ये अच्छी परम्परा है। 1979 में जब तत्कालीन प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई को ये आभाष हुआ कि सदन में उनकी स्थिति ठीक नहीं है, तो उन्होंने अविश्वास प्रस्ताव के पहले ही त्यागपत्र देना स्वीकार कर लिया।

    संत पवन दीवान जी ने लिखा है कि चुप-चुप रहकर सब कुछ सहकर सबका मान बढ़ाते हैं, बार-बार अपमानित होकर ग़ैरों का गुणगान करते हैं, मेहमानों को खूब खिलाकर चुपचाप सो जाते हैं, इसलिए ही छत्तीसगढ़िया परबुद्धि कहलाते हैं। छत्तीसगढ़ में सब कुछ है लेकिन कमी है स्वाभिमान की। मुझसे सही नहीं जाती ऐसी चुप्पी वर्तमान की। मंत्री ओपी चौधरी और भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने छत्तीसगढ़ के लोगों को परबुद्धि कहने पर आपत्ति जताई।

    नेता प्रतिपक्ष ने कहा, ये मेरा लिखा नहीं है। ये संत पवन दीवान की लिखी कविता है। मंत्री ओपी चौधरी के नाम का जिक्र करते हुए नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि आप कब पैदा हुए मुझे नहीं पता, लेकिन ‘छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया’ मेरे पिता का दिया नारा था।हम छत्तीसगढ़ की मूल भावना चरित्र को रख रहे हैं, उसमें भी लोगों को तकलीफ हो रही है।

    उन्होंने कहा कि 26 जुलाई 2022 को हम लोगों ने एक पवित्र निर्णय लिया था। सर्वसम्मति से एक संकल्प लाया था कि हसदेव में आबंटित कॉल ब्लॉक को रद्द करते हैं। ये सरकार जब बनी तब मुख्यमंत्री और मंत्रिमंडल ने शपथ नहीं लिया था, लेकिन 11 दिसंबर को हसदेव अरण्य को काटने का सिलसिला शुरू हो गया। हसदेव अरण्य को मध्य भारत का फेफड़ा कहते हैं। वहाँ के आदिवासियों की यह आस्था है। लेकिन मंत्रिमंडल आने के पहले ही प्रशासनिक अधिकारियों ने खनन करने के लिए सौंप दिया। पंद्रह हज़ार पेड़ों का डेथ वारंट जारी कर दिया। मैं मानता हूँ कि यह छत्तीसगढ़ की संप्रभुता पर हमला है।

    नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि राजस्थान की विधानसभा में हमारा मजाक उड़ाते हैं। सरकार के आते ही सरकार की करनी का क्या-क्या फल भुगतना पड़ रहा है। अपनी जड़ें काटकर दूसरों का महल बनाना चाहते हैं। यह कोई गोदाम है क्या कि जब चाहे तब आरी चला दो। प्रशासनिक अधिकारियों ने जिस ढंग से मुख्यमंत्री के शपथ लेने के पहले ही काटने की अनुमति दे दी, उसकी मैं निंदा करता हूँ। जिस रास्ते भगवान राम के पद चिह्न हैं, उसे उद्योगपति को सौंप दिया, और हमारे हिस्से हाथी-मानव द्वन्द सौंप दिया है। जिन लोगों को पंद्रह साल के लिए जंगल मिला था, उसे नौ साल में ही काट डाला। मैं कैसे सरकार को शाबासी दूँ?

    डॉ. महंत ने कहा कि गुरु बाबा घासीदास जी को जहां ज्ञान मिला वहाँ के जैतस्तंभ को किसी दुष्ट व्यक्ति ने काट दिया। सतनामी समाज ने चेतावनी दी थी कि इसका प्रतिकार उग्र हो जाएगा। तब भी वहां के कलेक्टर-एसपी ने कुछ नहीं किया। देश के इतिहास में इस तरह की यह पहली घटना थी। इसकी आंच हमारी मान्यताओं पर, हमारे धर्म तक पहुंची। इस घटना ने समाज को उद्वेलित कर दिया। क्या हुआ इस घटना का? इतने दिनों तक इसकी जाँच नहीं हो पाई।

    कोरिया जिले में 29 वर्षीय महिला का बलात्कार कर उसे ज़िंदा जला दिया गया। थाने पहुंचे एक फरियादी को पीट-पीट कर मार डाला गया। राखी के दिन मुख्यमंत्री के क्षेत्र में एक बहन का रेप कर मार दिया। इसे जंगलराज ना कहूँ, तो क्या कहूँ। मुख्यमंत्री, मंत्रिमंडल, प्रशासनिक अधिकारी एक भी आलोचना को बर्दाश्त नहीं कर सकते। अहंकार में डूबी सरकार है। पंचायत, मनरेगा में चल रहे पिछले सरकार के कार्यकाल के काम तक को रोक दिया गया। जनहित के नाम पर सरकार सिर्फ अपनी जेब भर रही है।

    नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि 2047 के विकसित छत्तीसगढ़ के मॉडल को किसने गूँथा। इसे बनाने वाले तो मुंबई से थे। राज्य की जनता को कृषि पर आधारित है, उसे तीसरे नम्बर पर रख दिया। उद्योगों को बढ़ावा दिया। सेवा क्षेत्र को बढ़ावा दिया। पिछले ढाई साल में जो काम सरकार ने किया है यह किसानी को खत्म करने की है। ये सब सोची समझी राजनीति है। बड़े-बड़े औद्योगिक घरानों को छत्तीसगढ़ सौंपकर मुक्त होना चाहते हैं। मुख्यमंत्री जी आदिवासी हैं, लेकिन पेसा क़ानून की राज्य में क्या हालत है? किस तरह आदिवासी इलाक़ों में इसका हाल हुआ है? खदान वाले इलाक़ों से आदिवासी भगाए जा रहे हैं।

    राज्य में भू माफिया बढ़ गए हैं। ये पुश्तैनी जमीन छीन रहे हैं। आदिवासियों का क्या होगा? अबूझमाड़ में क्या हो रहा है? वहाँ के जंगलों की कटाई शुरू हो गई है? कौन सा अंतराजीय गिरोह वहाँ काम कर रहा है? हमारी इज्जत धान का कटोरे से है लेकिन धान के उत्पादन में किसानों को खून के आंसू रोना पड़ा है। बुजुर्ग कहते हैं कि अंग्रेजों के जमाने में जो नहीं हुआ वो सरकार ने किया है। घरों में जाकर जांच हो रही है। धान ख़रीदी में गड़बड़ी हो रही है। जशपुर जिले के पचास हज़ार पंजीकृत किसानों में से आठ हज़ार किसान अपना धान नहीं बेच पाये।

    भारतमाला परियोजना में पाँच सौ करोड़ रुपए से ज़्यादा का भ्रष्टाचार हुआ है। एक खसरे के कई-कई टुकड़ों में बेचा गया। हमारे पैसों में भ्रष्टाचार हो रहा है तो इसका दोष मैं किसे दूँ? मनमोहन सिंह की सरकार में वनभूमि अधिनियम बना था। पट्टा देने का प्रावधान किया था। इसे भी आप नहीं कर रहे हैं।

    महतारी वंदन योजना की वजह से आपकी सरकार बनी है। अगर ये योजना नहीं बनती तो आपना राम नाम सत्य हो गया था। सरकार इस योजना के ज़रिए पुरुषों को शराब पिला रही है। बच्चों को शराब पिला रहे हैं। एक महीने में एक हज़ार करोड़ रुपए का शराब पिलाकर देश में रिकॉर्ड बनाना चाहते हैं। एक हाथ से पैसा देकर दूसरे हाथ से शराब पहुंचा देते हैं। मंत्री का वीडियो है मेरे पास, जिसमें उन्होंने कहा था कि शराब से जो पैसा आता है, उसे ही हम महतारी वंदन में देते हैं।

    माइको फाइनेंस चिट फण्ड खुलाया गया था। कोरबा, जांजगीर चांपा, धमतरी, कांकेर, बस्तर जैसे कई जगहों पर ये खोला गया था। 30-30 हज़ार का लोन लेने वाली महिलाये रो रही हैं। बच्चों को स्कूल भेजने तक के पैसे उनके पास नहीं हैं। मैंने कई बार मुख्यमंत्री को चिट्ठी लिखी है। पीड़ितों ने मंत्रियों से मुलाक़ात की है लेकिन कुछ नहीं हुआ।

    ग़रीब के बच्चों को पढ़ाना बंद किया जा रहा है। दस हज़ार स्कूल बंद कर दिए गए हैं। शिक्षकों की कमी है। एक मंत्री थे जिन्होंने कहा था कि 33 हज़ार स्कूली शिक्षकों की नियुक्ति होगी। उन्हें ही आपने लोकसभा भेज दिया। अपने लोगों के लिए ही आपका बर्ताव कैसा है ये देख लीजिए। युक्तियुक्तकरण से किसे फायदा हुआ? गुरुजी लोग सड़कों पर घूम रहे हैं। चांपा के आदमी को बस्तर-सरगुजा भेज दिया गया। अपने परिवार को वो सुखमय जीवन दे सकता था। पाठ्यपुस्तक निगम में करोड़ों रुपए की किताब छपवाकर उसे कारखानों और रद्दी में बेच दिया।

    उच्च शिक्षा का हाल भी बुरा है। अध्यापकों के पद खाली हैं लेकिन सरकार नया विधेयक ला रही है। इसके बाद किराए की एक खोली में भी महाविद्यालय खुल सकेगा। सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ चिकित्सकों के 1 हज़ार 418 पद खाली हैं। चिकित्सा अधिकारी के 560 और अन्य लोगों के करीब ढाई हज़ार पद खाली हैं। इन पदों को क्यों नहीं भरा जा रहा है? केंद्र की योजना से बस्तर में सुपर स्पेशिलिटी हॉस्पिटल बनाया था लेकिन उसे पीपीपी मोड पर निजी हाथों में सौंप दिया गया। हार्ट के मरीज तीन सौ किलोमीटर दूर रायपुर आने पर मजबूर हैं। बस्तर जैसे क्षेत्र में 80 फीसदी महिलायें एनीमिया से पीड़ित है।

    गौरेला पेंड्रा में एक ग़रीब कलेक्टर पहुंचा था। एक अस्पताल में तीन महिलाओं की मौत की जांच करने पहुँच गया। उधारी का डॉक्टर अस्पताल में आकर ऑपरेशन करता था। स्वास्थ्य मंत्री ने उसे खूब डांटा। वह ग़रीब का बच्चा था। बन गया था डिप्टी कलेक्टर। रामविचार नेताम ने भी उसे दो थप्पड़ जड़ा था। उसकी गलती इतनी थी कि मंत्रियों की ग़लत बात नहीं सुनता था। स्वास्थ्य मंत्री की उसने नहीं सुनी थी, इसलिए उसे हटा दिया।

    मनरेगा को आपने ठप्प कर दिया। लाखों लोग भूखे मर रहे हैं। उनके पास कोई काम नहीं है। मनरेगा का नाम बदल दिया है। राम के नाम पर किया है तो नियम तो बना ले। मुख्यमंत्री, मंत्री दिल्ली जाकर गिड़गिड़ा चुके हैं। तब भी कुछ नहीं हुआ। प्रधानमंत्री आवास योजना में भी गड़बड़ी हो रही है। जहां जमीन नहीं है वहाँ भी पैसा दे दिया गया है।

    नागदबरा गांव के बैगा लोगों को राष्ट्रपति का दत्तक पुत्र कहते हैं। तीन बैगाओं की मौत हुई थी। खुले में पोस्टमार्टम कर उसे जलने से मौत बता दिया गया। बलरामपुर जिले में एक एसडीएम ने बुजुर्ग को पीटकर मार डाला। सूरजपुर में एक एसडीएम उसके पास आए फरियादी को ही पीटता है। राजनांदगांव से राजधानी तक खुलेआम गोली चल रही है। राज्य में सूखा नशा गली गली घूम रहा है। मेरे दूर का रिश्तेदार हंसते हंसते मर गया। पिता ने उसे टोककर कहा था कि नशा कर क्यों समाज को बदनाम कर रहा है। वह कमरे में गया और फांसी लगाकर मर गया।

    16 जून को कोरिया जिले में हुई हत्या ने दिल दहला दिया। रेत की लड़ाई में तीन लोगों की हत्या हो गई। सक्ती जिले में मोटरसाइकिल से दो लोग आकर घर पर पूछा कि लड़की कहाँ है? लड़की आई तो उसे तीन गोली मारकर चले गए। कोटमी में सोने-चाँदी का सामान बेचने गए लोगों को लूटने की कोशिश की गई। नहीं दिया गया तो गोली मार कर चले गए। ढाई साल में इतना ख़राब समाज कहां से आ गया?

    राज्य की नदियाँ पर्यावरण की रीढ़ है। नदियों को खोद देंगे तो हमारी पीढ़ियाँ क्या करेंगी? यदि ऊपर वाले ने हमे विधायक, नेता, मंत्री, मुख्यमंत्री बनाकर भेजा है तो कुछ अच्छा करने के लिए भेजा है। शराब को लेकर हम पर बहुत आरोप लगते थे। अब क्या हो रहा है? एक हज़ार करोड़ रुपए की शराब एक दिन में बिक रही है। सड़क हादसे में रुककर मदद करने जायें तो हमे डर लगता है कि कहीं लोग हमे ना पीट दें?

    नक्सलवाद के खात्मे पर सदन ने बधाई दी। धन्यवाद प्रस्ताव लाया था। हम उसकी चर्चा में नहीं थे, क्योंकि उस दिन ग़रीब आदिवासी जो मारे गए, उनकी चर्चा नहीं की गई। गरीब निर्दोष आदिवासियों की रिहाई का मामला अटका है। बड़े-बड़े हथियार वाले बाहर हैं। निर्दोष आदिवासियों की चिंता कर लेनी चाहिए। खनिज पर्यावरण पुलिस का दोस्ताना संबंध चल रहा है। बलरामपुर में अवैध रेत खनन रोकने गए अधिकारी को रौंद कर मार डाला। मवेशी ब्लू डस्ट से मर रहे हैं। उद्योगों से निकलने वाले राखड़ से लोग प्रभावित हुए हैं। कई लोगों की मौत हुई है।

    अजय चंद्राकर की टिप्पणी पर मंत्री रामविचार नेताम ने कहा कि कुछ दिन आप इन्हें प्रतिनियुक्ति पर ले जायें। इस पर भूपेश बघेल ने कहा कि- उधर रहते हुए ही वो विपक्ष की भूमिका निभा रहे थे, लेकिन ऊपर वालों से ई डी भेज दी। चरणदास महंत ने कहा कि हमने तो पहले से कह रखा है कि अजय चंद्राकर कुछ दिन प्रतिनियुक्ति पर हमारे पास आ जाएं।

    अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा करते हुए डॉक्टर चरणदास महंत ने कहा कि, बिजली की दर बहुत बढ़ा दी गई है। ये समझ के परे है। नेता प्रतिपक्ष डॉक्टर चरणदास महंत ने कहा कि, सरकारें आती हैं। सरकारें जाती हैं लेकिन देश बचा रहना चाहिए। ये प्रजातंत्र तब तक जीवित रहेगा जब तक शासक सेवक रहे। अटल जी ने ये कहा था इसे याद रखना चाहिए।

    ऐसा विपक्ष किस काम का जो सिर्फ औपचारिकता पूरी करे- चंद्राकर

    भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने अविश्वास प्रस्ताव पर सत्तापक्ष कि ओर से जवाब देते हुए कहा कि विपक्ष वाचडॉग होता है, लेकिन ऐसा विपक्ष किस काम, जिसने सिर्फ औपचारिकता पूरी कर दी। भूपेश बघेल मध्य प्रदेश की विधानसभा में रहे वो जानते होंगे कि ऐसे अविश्वास प्रस्ताव की पोंगरी बनाकर उचित जगह पर डाल लीजिए। जिनके अपने घर शीशे के होते हैं, वो दूसरों के घर पत्थर नहीं फेंका करते। इतिहास में हम गजनवी, तैमूर, अब्दाली को पढ़ते हैं, लेकिन नादिर शाह के समय दिल्ली में सबसे ज्यादा लूट हुई। पिछली सरकार नादिर शाह की तरह ही थी।

    नेता प्रतिपक्ष ये बताए कि उनकी निष्ठा राज्य के प्रति है या किसी एक परिवार की। कांग्रेस के दो इतिहास लिखे गए हैं। एक आजादी के पहले और एक बाद। जो फ़्लेटर होता है वो जनता के प्रति जवाबदेह नहीं होता। एक सज्जन थे जो कहते थे कि इंदिरा इस इंडिया, इंडिया इस इंदिरा और एक नेता प्रतिपक्ष थे, जिन्होंने कहा था कि सोनिया गांधी के कहने पर झाड़ू भी लगा सकते हैं।

    अजय चंद्राकर ने नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत से पूछा कि धुरंधर देखी है आपने। उस फ़िल्म में जमील जमाली की एक विशेषज्ञता थी कि वह हर किसी का आदमी था। आपने अंबिकापुर में बयान दिया था कि इस बार टीएस सिंहदेव के चेहरे पर चुनाव लड़ा जाएगा, लेकिन रायपुर में भूपेश बघेल के बयान के बाद आपने अपना पाला बदल लिया।

    उन्होंने कहा कि नवजोत सिंह सिद्धू ने बयान दिया था कि दिल्ली में पाँच सौ करोड़ रुपए देने पड़ते हैं। कांग्रेस के एक मुख्यमंत्री का बयान आया था कि हम एक हज़ार करोड़ रुपए दे सकते हैं। एक राज्य में ढाई-ढाई साल में मुख्यमंत्री बदल गए। क्या राज्य में टीएस बाबा के पास लूलू माल नहीं था। क्या कांग्रेस इस सिद्धांत का पालन करती है कि अगर नेता डकैत भी है, तो उसे ही नेता मानना है। किसी  राजनीतिक दल का वैचारिक चरित्र ऐसा होना चाहिए?

    तीन साल फरार था कांग्रेस का कोषाध्यक्ष

    अजय चंद्राकर ने कहा कि कांग्रेस पार्टी ऐसी पार्टी है, जिसका कोषाध्यक्ष तीन साल से फ़रार था। बगैर कोषाध्यक्ष पार्टी चलती है? पूरे देश के राजनीतिक इतिहास में आज तक ऐसा उदाहरण आया हो कि उसका कोषाध्यक्ष लापता है। आईना बेचने वालों को थोड़ा आईना दिखाता हूँ। छत्तीसगढ़ के लोगों की भावना के साथ खिलवाड़ किया गया। 76 फीसदी कुल आरक्षण का बिल लाया गया। विधानसभा में इसे पारित किया गया। एक संकल्प आया कि नौंवी सूची में इसे जोड़ा जाए। हमारे पाले में गेंद डालने की कोशिश की गई। केंद्र सरकार पर डाल दिया। अगर दम था तो करके दिखाना था। इस तरह का प्रशासन साय सरकार नहीं चलाती।

    राज्यपाल को कहीं से फोन आ गया

    भूपेश बघेल ने कहा कि सार्वजनिक रूप से राज्यपाल ने कहा था कि आप बिल विधानसभा में पारित कर लाइए। मैं दस्तख़त करूँगी, लेकिन उन्हें कहीं से फ़ोन आ गया। उन्होंने दस्तख़त नहीं किया। अजय चंद्राकर ने कहा कि राजभवन को अंधेरे में रखा गया था। नौंवी सूची में जोड़ने की बात का जिक्र नहीं था।

    चंद्राकर ने टीएस सिंहदेव की चिट्ठी का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पंचायत मंत्री रहते उन्होंने चिट्ठी लिखकर कहा था कि पैसे की कमी होने की वजह से आठ लाख आवास नहीं बनाए जा सकते। उन्होंने मंत्रिमंडल के नियमों के विरुद्ध मुख्य सचिव की अध्यक्षता में कमेटी बनाए जाने पर भी आपत्ति जताई थी। भारसाधक मंत्री को विश्वास में लिए बगैर कार्रवाई की गई। हड़ताल की वजह से नौकरी से हटाए गए लोगों को मंत्री को विश्वास में लिए बगैर नियुक्ति दी गई। इस तरह से पिछली सरकार चलती थी।

    अजय चंद्राकर ने कहा- सदन में विपक्ष में रहते हुए प्रिविलेज का नोटिस देते थे, तब वह रद्द हो जाता था। जब सत्तापक्ष के लोग कुछ देते थे तो उसे विचाराधीन रखा जाता था। टीएस सिंहदेव के संदर्भ में सदन के एक विधायक ने जान से खतरे की आशंका जताई थी, तब उस पर क्या किया?

    अजय चंद्राकर ने कहा- आरक्षण में धोखे के बाद छत्तीसगढ़ के इतिहास में नग्न प्रदर्शन पहली बार लोगों ने देखा था। फर्जी जाति प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी के मुद्दे पर प्रदर्शन हुआ था। पाटन में पाँच एससी परिवार के लोगों ने आत्महत्या की थी। ऐसा शासन अभी नहीं है।

    पिछली सरकार में कर दिया सबलेट

    अजय चंद्राकर ने कहा कि सदन में ही पिछली सरकार के मुख्यमंत्री ने सीना ठोककर कहा था कि मैं बोधघाट परियोजना शुरू करके रहूँगा। 12 करोड़ रुपए फूंक दिए गए। मूँछों में ताव दिया गया था। क्या हुआ? रबी फसल को समर्थन मूल्य पर लेने की बात कही गई थी, लेकिन क्या हुआ? पिछली सरकार में सबलेट कर दिया गया। दारू आप देखो। राशन आप देखो? कोयला आप देखो? साय सरकार आते ही पीएससी घोटाले की जांच का निर्णय लिया गया था। पिछली सरकार में एक ही कमरे से 35 लोगों की भर्ती हो गई थी।

    चंद्राकर ने कहा कि- भारतमाला परियोजना के लिए जमीन का अधिग्रहण भूपेश सरकार में हुआ था। एक भी जमीन का अधिग्रहण साय सरकार में नहीं हुआ है। ईडी की कार्यवाही का जिक्र भूपेश बघेल ने किया था। मेरे ख़िलाफ़ एक भी नामजद आरोप नहीं है। पिछली सरकार ने सेस लगाया था. तीन हज़ार करोड़ से ज़्यादा का सेस मिला था। स्वास्थ्य के लिए उपयोग होना था। कोरोना का जिक्र किया गया था। कांग्रेस पर हमला जारी रखते हुए अजय चंद्राकर ने कहा कि शराब की घर पहुँच शुरू की गई थी, उसमें भी पैसा खा लिया। किसी को नहीं छोड़ा गया था।

    गोधन न्याय योजना का जिक्र करते हुए अजय चंद्राकर ने कहा कि 2713 करोड़ रुपए सेस की राशि खर्च की गई। नरवा, गरवा, घुरवा, बाड़ी में पैसा लगाया गया। केंद्र के पैसे को खर्च किया गया। केंद्र को कोसते भी रहे और उसके पैसे का उपयोग भी करते रहे। पैरा ढुलाई में भी सेस की 53 करोड़ की राशि खर्च की गई। सरकारी खजाने की ऐसी खुली लूट कभी किसी ने नहीं देखी। वर्मी कंपोस्ट के नाम पर 125 करोड़ रुपए खर्च कर दिए गए। गोबर में पेंट खरीदने के लिए कलेक्टरों में होड़ मच गई थी। मैंने तब कलेक्टरों से कहा कि कहाँ पेंट हुआ है इसे दिखा दीजिए।

    भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने कहा- मोहसिन किदवई की लड़की की इवेंट कंपनी को चंद्रखुरी में साढ़े पाँच करोड़ रुपए का काम दे दिया गया। कुल 28 करोड़ रुपए उन्हें दिए गए। 246 करोड़ रुपए का गोबर बह गया। किसी को पता नहीं। चुनाव के दो महीने पहले राजीव मितान क्लब को 144 करोड़ रुपए जारी कर दिए। इसकी कोई आडिट नहीं। पिछली सरकार में उद्योग कंपनियों के दस हज़ार करोड़ रुपए के विद्युत शुल्क माफ किए गए। कौन-कौन से उद्योग घराने थे जिनके विद्युत शुल्क माफ किए गए?

    चंद्राकर ने पूर्व  खेल मंत्री पर टिप्पणी करते हुए यह पूछा कि 4 महीने में छह ओलंपिक कैसे करवा दिए? पाँच साल में नौजवान मंत्री बेरोजगार की परिभाषा तय नहीं कर पाए। इसकी परिभाषा तय करने एक ग़ैर मान्यता प्राप्त कंपनी को दो करोड़ रुपए दे दिए। उन्होंने कहा कि 12 करोड़ रुपए खर्च कर सामाजिक आर्थिक सर्वेक्षण कराया, लेकिन उसे टेबल नहीं किया।

    क्वांटिफ़ाइबल डाटा आयोग की रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हुई। कांग्रेस सरकार के वक्त राज्यपाल के पहले अभिभाषण में इसे शामिल कर आत्मसात करवाया गया, लेकिन शराबबंदी नहीं हुई। जल संसाधन नीति बनाने का जिक्र था, लेकिन जल संसाधन ही खत्म हो गए। दो सौ फ़ूड पार्क खोलने का जिक्र था, लेकिन कहाँ है?

    धर्मांतरण के खिलाफ कड़े कानून विष्णुदेव साय की सरकार ने बनाई। कांग्रेस इस पर सवाल खड़े करती है। छत्तीसगढ़ समान नागरिक संहिता जल्द लागू हो जाएगी। प्रधानमंत्री आवास योजना की 7 लाख मकान वापस भूपेश सरकार में वापस हुए। विष्णुदेव सरकार में 18 लाख आवास गरीबों को देने का वादा पूरा किया गया। प्रधानमंत्री कौशल उन्नयन के तहत युवाओं का कौशल उन्नयन किया जा रहा है। 5 मेडिकल कॉलेज भी खुलने जा रहा है। रेलवे अधोसंरचना विकास पूरे छत्तीसगढ़ में चल रहा है। भूपेश बघेल सरकार एकमात्र ऐसी सरकार रही, जिन्होंने कर्ज पटाने के लिए कर्ज लिया। भूपेश सरकार में मुख्यमंत्री तीर्थ योजना को बंद कर जेल दर्शन योजना शुरू हो गई. अधिकारी-नेता जेल जाने लगे. और जेल निकलते जंग जीतकर इस तरह स्वागत होने लगी.

    अजय चंद्राकर ने कहा कि साय सरकार ने एक विजन के साथ जो सूरत बदलने की कोशिश की यह अद्भुत है। दीपक बनकर राह सबकी रोशन करते है। ऐसे श्रेष्ठ व्यक्ति का सब अभिनंदन करते हैं। ऐसे कर्मयोगी का अभिनन्दन जो मानवता का मान बढ़ाते हैं. आज कार्यपालिका वो चोरी-डकैती नहीं है. मैंने नेता-प्रतिपक्ष से आग्रह किया कि अविश्वास इसमें कुछ नहीं है। पहली बार नेता-प्रतिपक्ष के खिलाफ देश में षड्यंत्र छत्तीसगढ़ में हुआ है। नेता जी को उनके सारे विरोधियों ने रहमान डकैत बनाकर निपटा दिए।

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