नई दिल्ली। संसद की कोयला एवं खान मंत्रालय की परामर्शदात्री समिति की बैठक में रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने राष्ट्रीय क्रिटिकल मिनरल मिशन (NCMM) और वाणिज्यिक कोयला खनन सुधारों पर चर्चा के दौरान छत्तीसगढ़ को देश की ऊर्जा सुरक्षा और भविष्य की क्रिटिकल मिनरल अर्थव्यवस्था का प्रमुख केंद्र बनाने की पैरवी की। बैठक में केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी ने सांसद द्वारा उठाए गए प्रमुख मुद्दों पर अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।
बैठक में सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी, सेमीकंडक्टर, रक्षा, अंतरिक्ष, स्वच्छ ऊर्जा और आधुनिक विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में बढ़ती जरूरतों को देखते हुए छत्तीसगढ़ की खनिज संपदा का वैज्ञानिक और दीर्घकालिक दृष्टिकोण से विकास किया जाना चाहिए। उन्होंने राज्य में क्रिटिकल मिनरल प्रोसेसिंग पार्क, सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, अनुसंधान एवं विकास (R&D), आधुनिक खनिज प्रसंस्करण, रीसाइक्लिंग, वैल्यू एडिशन, कौशल विकास और खनिज आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने का सुझाव दिया।
सांसद ने लिथियम, टिन, रेयर अर्थ एलिमेंट्स (REE), ग्रेफाइट, कोबाल्ट, निकेल, टंगस्टन, मोलिब्डेनम, नाइओबियम, वैनेडियम, टाइटेनियम, जिरकोनियम, बेरिलियम, गैलियम, इंडियम, टैंटलम, टेल्यूरियम, सेलेनियम, प्लैटिनम समूह के तत्व (PGM), फॉस्फेट और पोटाश सहित अन्य महत्वपूर्ण एवं सामरिक खनिजों के वैज्ञानिक अन्वेषण, निवेश, प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन को गति देने पर जोर दिया।
उन्होंने विशेष रूप से कोरबा सहित संभावित क्षेत्रों में लिथियम, टिन, रेयर अर्थ तत्व, ग्रेफाइट, हीरा और अन्य महत्वपूर्ण खनिजों के विस्तृत सर्वेक्षण, अधिक खनन योग्य ब्लॉकों की पहचान, भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI), मिनरल एक्सप्लोरेशन एंड कंसल्टेंसी लिमिटेड (MECL), राष्ट्रीय खनिज अन्वेषण ट्रस्ट (NMET) और भारतीय खान ब्यूरो (IBM) की भूमिका मजबूत करने की आवश्यकता बताई। साथ ही जिला स्तर पर खनिज डाटाबेस तैयार करने और स्थानीय युवाओं के लिए कौशल विकास के माध्यम से रोजगार आधारित खनिज इकोसिस्टम विकसित करने का भी सुझाव दिया।
बैठक के दौरान केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी ने सांसद द्वारा उठाए गए विषयों पर अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए और छत्तीसगढ़ से जुड़े प्रस्तावों पर सकारात्मक पहल का आश्वासन दिया।
सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ के पास वर्तमान की ऊर्जा शक्ति के साथ-साथ भविष्य की क्रिटिकल मिनरल क्षमता भी है। उनका लक्ष्य केवल खनिजों का उत्खनन नहीं, बल्कि अनुसंधान, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन, निवेश, आधुनिक तकनीक और रोजगार आधारित मजबूत औद्योगिक इकोसिस्टम विकसित करना है, जिससे छत्तीसगढ़ देश की नई औद्योगिक अर्थव्यवस्था का अग्रणी राज्य बन सके।




