बिलासपुर। दुर्ग लोकसभा चुनाव से जुड़ी पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और सांसद विजय बघेल के बीच चल रही कानूनी लड़ाई अब अहम पड़ाव पर पहुंच गई है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट 17 सितंबर को तय करेगा कि विजय बघेल की चुनाव याचिका पर आगे साक्ष्य और सुनवाई की प्रक्रिया जारी रहेगी या भूपेश बघेल की प्रारंभिक आपत्ति स्वीकार कर याचिका को शुरुआती स्तर पर ही खारिज कर दिया जाएगा।
भूपेश बघेल ने आदेश 7 नियम 11 के तहत लगाई आपत्ति
सुनवाई के दौरान भूपेश बघेल की ओर से कोर्ट को बताया गया कि 9 सितंबर को सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 7 नियम 11 के तहत आवेदन दाखिल किया गया है। इसमें विजय बघेल की चुनाव याचिका को प्रारंभिक स्तर पर ही खारिज करने की मांग की गई है। आवेदन में लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 86(1) का भी उल्लेख किया गया है।
हाईकोर्ट ने इस आवेदन पर दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं और आदेश के लिए 17 सितंबर की तारीख निर्धारित की है।
साक्ष्य दर्ज कराने हाईकोर्ट पहुंचे थे विजय बघेल
इस मामले में 18 अगस्त को अधिवक्ताओं की मौजूदगी में 10 सितंबर की तारीख चुनाव याचिकाकर्ता का साक्ष्य दर्ज करने के लिए तय की गई थी। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार विजय बघेल और उनके गवाह सौरभ दुबे हाईकोर्ट पहुंचे थे।
हालांकि, सुनवाई शुरू होने पर भूपेश बघेल की ओर से आदेश 7 नियम 11 के तहत आवेदन पेश किए जाने की जानकारी दी गई। इसके बाद कोर्ट ने पहले इसी आवेदन पर दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं।
विजय बघेल ने उसी दिन पेश किया जवाब
भूपेश बघेल की ओर से आवेदन दाखिल किए जाने के बाद विजय बघेल की ओर से भी उसी दिन उसका जवाब प्रस्तुत कर दिया गया। दोनों पक्षों की सहमति से हाईकोर्ट ने आवेदन पर तत्काल सुनवाई की।
भूपेश बघेल की ओर से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अधिवक्ता मयंक जैन उपस्थित हुए। वहीं विजय बघेल की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता टीके झा सहित अन्य अधिवक्ताओं ने पक्ष रखा।
17 सितंबर को साफ होगी आगे की कानूनी दिशा
अब हाईकोर्ट के आदेश पर इस चुनाव याचिका की आगे की प्रक्रिया निर्भर करेगी। यदि भूपेश बघेल का आवेदन खारिज होता है, तो चुनाव याचिका की सुनवाई और साक्ष्य दर्ज करने की प्रक्रिया आगे जारी रहेगी। वहीं, आवेदन स्वीकार होने पर याचिका प्रारंभिक स्तर पर ही समाप्त हो सकती है।
क्या है आदेश 7 नियम 11?
सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 7 नियम 11 के तहत प्रतिवादी किसी वाद या याचिका को शुरुआती चरण में खारिज करने की मांग कर सकता है, यदि उसमें कानूनन कार्रवाई का आधार नहीं बनता या वह निर्धारित कानूनी आवश्यकताओं को पूरा नहीं करती। मौजूदा मामले में भूपेश बघेल की ओर से इसी प्रावधान के आधार पर विजय बघेल की चुनाव याचिका पर प्रारंभिक आपत्ति उठाई गई है।




