नई दिल्ली। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को अपने आवास पर ‘सिंदूर’ का पौधा लगाकर पर्यावरण संरक्षण और राष्ट्र सुरक्षा दोनों का संदेश दिया। यह पौधा उन्हें 25-26 मई को गुजरात के कच्छ दौरे के दौरान 1971 भारत-पाक युद्ध में बहादुरी दिखाने वाली महिलाओं के एक समूह ने भेंट किया था। सिंदूर का यह पौधा न सिर्फ पर्यावरणीय महत्व रखता है, बल्कि इसका गहरा सांस्कृतिक और राष्ट्रवादी जुड़ाव भी है। इसे हाल ही में हुए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ से जोड़ा जा रहा है। 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में भारतीय सेना ने 7 मई को पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) और पाकिस्तान में स्थित 9 आतंकी ठिकानों पर एयरस्ट्राइक की थी, जिसमें करीब 100 आतंकियों को ढेर किया गया था। इस सैन्य कार्रवाई को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ नाम दिया गया था।
सिंदूर का पौधा धार्मिक दृष्टि से शुभता और शक्ति का प्रतीक माना जाता है। यह पत्तेदार पौधा आमतौर पर मंदिरों और घरों में लगाया जाता है और इसकी देखभाल भी आसान होती है। पर्यावरण की दृष्टि से भी यह पौधा उपयोगी है, जो न केवल हरियाली बढ़ाता है, बल्कि वातावरण को भी शुद्ध करता है। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने गुजरात दौरे के दौरान भुज में कहा था कि भारत की ओर आंख उठाने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। पाकिस्तान को सख्त चेतावनी देते हुए उन्होंने कहा, *”सुख-चैन से जियो, अपने हिस्से की रोटी खाओ, नहीं तो मेरी गोली तो है ही।” इस अवसर पर पौधा लगाकर प्रधानमंत्री ने देशवासियों को यह संदेश दिया कि पर्यावरण संरक्षण जितना जरूरी है, उतनी ही महत्वपूर्ण है देश की सुरक्षा। उनके इस कदम को प्रतीकात्मक रूप से पर्यावरण और राष्ट्रीय भावना दोनों से जोड़ा जा रहा है।




