नई दिल्ली।
पूर्व आरबीआई गवर्नर डॉ उर्जित पटेल को केंद्र सरकार ने अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष में कार्यकारी निदेशक नियुक्त किया है। उनकी यह नियुक्ति तीन साल के लिए की गई है। यह कदम न केवल भारत की वैश्विक आर्थिक उपस्थिति को मजबूत करेगा बल्कि डॉ पटेल की विशेषज्ञता का भी प्रमाण है।
आरबीआई गवर्नर रहते लिए बड़े फैसले
सितंबर 2016 में रघुराम राजन के बाद उर्जित पटेल ने 24वें गवर्नर के रूप में पदभार संभाला था। उनके कार्यकाल में कई ऐतिहासिक फैसले हुए जिनमें सबसे बड़ा फैसला 2016 की नोटबंदी थी। यह फैसला उनकी रिपोर्ट के आधार पर लिया गया था।
अचानक दिया इस्तीफा
दिसंबर 2018 में उर्जित पटेल ने व्यक्तिगत कारणों का हवाला देते हुए पद से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद वे 1992 के बाद सबसे कम अवधि तक गवर्नर रहने वाले पहले व्यक्ति बन गए।
आर्थिक सुधारों के लिए पहचाने जाते हैं
पटेल ने आरबीआई के लिए 4 प्रतिशत महंगाई दर की सीमा तय की थी। इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए मौद्रिक नीति बनाई गई। उनकी रिपोर्ट के आधार पर भारत ने सीपीआई को महंगाई दर का आधिकारिक पैमाना अपनाया




