देपालपुर (इंदौर)। शारदीय नवरात्रि का पवित्र पर्व चल रहा है, और माता के भक्तों में उत्साह चरम पर है। मालवा के देपालपुर में स्थित प्राचीन महिषासुर मर्दिनी माता मंदिर अपनी चमत्कारी शक्ति और अनूठी विशेषताओं के लिए प्रसिद्ध है। यह मंदिर न केवल आस्था का केंद्र है, बल्कि संतान सुख प्रदान करने वाली माता के रूप में भी जाना जाता है। खास बात यह है कि माता दिन में तीन बार रूप बदलती हैं, जो भक्तों के लिए एक अनोखा अनुभव है।
राजा भोजपाल ने बनवाया था मंदिर
देपालपुर का यह महिषासुर मर्दिनी माता मंदिर मध्य प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है। मंदिर के पुजारी शंकर पूरी गोस्वामी के अनुसार, इस मंदिर का निर्माण राजा भोजपाल ने करवाया था। किंवदंती है कि नवरात्रि की नवमी तिथि पर माता को मदिरा पान कराया जाता है। एक रोचक कहानी के अनुसार, कई वर्ष पहले एक तहसीलदार ने माता के चमत्कार को झूठा माना और मंदिर की जगह की खुदाई का आदेश दिया। लेकिन माता ने उन्हें सपने में दर्शन देकर अपनी शक्ति का एहसास कराया। इसके बाद उसी तहसीलदार ने मंदिर का पुनर्निर्माण करवाया। तब से यह मंदिर भक्तों की आस्था का प्रमुख केंद्र है। नवरात्रि के दौरान यहां का माहौल और भी भक्तिमय हो जाता है, जब दूर-दूर से लोग माता के दर्शन के लिए आते हैं।
संतान सुख की माता
यह मंदिर संतान सुख की कामना करने वाले दंपतियों के लिए विशेष महत्व रखता है। भक्त मानते हैं कि माता की कृपा से उनकी संतान की इच्छा पूरी होती है। संतान प्राप्ति के बाद भक्त मंदिर में लौटकर पूजा और आभार प्रकट करते हैं।
दिन में तीन रूपों में दर्शन
मंदिर की एक अनूठी विशेषता यह है कि माता की मूर्ति दिन में तीन बार रूप बदलती है। सुबह बाल्यावस्था, दोपहर में किशोरावस्था और रात में वृद्धावस्था में माता दर्शन देती हैं। इस चमत्कार को देखने के लिए सुबह से ही भक्तों की भीड़ जमा होती है। रात में युवतियां पारंपरिक गरबा नृत्य के जरिए माता की आराधना करती हैं, जो इस मंदिर की एक और खासियत है।
गोबर से स्वास्तिक की परंपरा
मंदिर में मन्नत मांगने की एक खास परंपरा है। महिलाएं मंदिर के पीछे गोबर से उल्टा स्वास्तिक बनाकर मन्नत मांगती हैं। मन्नत पूरी होने पर वे लौटकर स्वास्तिक को सीधा करती हैं। लोग अपने बच्चों को माता के सामने लाकर उनका माथा टिकवाते हैं ताकि माता का आशीर्वाद मिले।
नवरात्रि में विशेष आयोजन
नवरात्रि के दौरान मंदिर में भक्तों का उत्साह और बढ़ जाता है। नौ दिनों तक यज्ञ, अनुष्ठान और कुमकुम पूजन जैसे आयोजन होते हैं, जिनमें सैकड़ों भक्त शामिल होते हैं। खासकर महिलाओं के लिए कुमकुम पूजन का विशेष कार्यक्रम आयोजित होता है, जिसमें परिवार और विश्व शांति की कामना की जाती है। देपालपुर का यह मंदिर आस्था, चमत्कार और भक्ति का प्रतीक है, जहां भक्तों की हर मनोकामना पूरी होती है।




