आशीष पदमवार/बीजापुर। छत्तीसगढ़ सरकार के कड़े रुख और सुशासन के दावों को बीजापुर का पशुधन विकास विभाग खुलेआम चुनौती दे रहा है। विभाग के उपसंचालक डॉ. राजीव शर्मा पर आरोप हैं कि वे विभागीय मंत्री रामविचार नेताम के कड़े और लिखित आदेश को भी ठेंगा दिखा रहे हैं। मंत्री के अल्टीमेटम के 20 दिन बीत जाने के बाद भी उपसंचालक कार्यालय ‘कुंभकर्णी नींद’ सोया हुआ है, जिससे साफ झलकता है कि विभाग में अफसरों की मनमर्जी किस कदर हावी है।
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, बीजापुर जिले के पशुधन विकास विभाग में पदस्थ सहायक पशु चिकित्सा क्षेत्र अधिकारी नरोत्तम समरथ के खिलाफ विभागीय मंत्री रामविचार नेताम को एक गंभीर शिकायत सौंपी गई थी। शिकायत में बताया गया कि उक्त अधिकारी पिछले 30 वर्षों से एक ही जिले में जमा हुआ है। हद तो तब हो गई जब नियमों को ताक पर रखकर पिछले 20 वर्षों से उन्हें उनके मूल कार्य से दूर रखा गया और उपसंचालक कार्यालय में ‘संलग्न’ कर भंडार शाखा का प्रभारी बना दिया गया।
शासन की स्पष्ट नीति है कि किसी भी अधिकारी-कर्मचारी को इस तरह नियम विरुद्ध संलग्न नहीं रखा जा सकता। इसके बावजूद उपसंचालक कार्यालय में यह सांठगांठ सालों से फल-फूल रही है।

दवाई खरीदी और DMF फंड में गड़बड़ी के आरोप
भंडार शाखा के प्रभारी रहते हुए नरोत्तम समरथ पर दवाई खरीदी और डीएमएफ निधि के पैसों में भारी वित्तीय अनियमितता और गड़बड़ी के गंभीर आरोप लगते रहे हैं। सूत्रों की मानें तो यही वजह है कि अधिकारी इस मलाईदार कुर्सी को छोड़ना नहीं चाहते। पिछले 20 वर्षों में इनका दो बार अन्यत्र तबादला भी हुआ, लेकिन ट्रांसफर ऑर्डर को रद्दी की टोकरी में डाल दिया गया। नए रिलीवर के आने के बाद भी इन्हें कार्यमुक्त नहीं किया गया, जो जिले के बड़े अधिकारियों के साथ उनकी गहरी साठगांठ की ओर इशारा करता है।
मंत्री ने दी थी अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी
जब इस घोटाले और मनमर्जी की भनक विभागीय मंत्री रामविचार नेताम को लगी, तो उन्होंने मामले को बेहद गंभीरता से लिया। मंत्री ने सख्त लहजे में निर्देश जारी किया कि उक्त अधिकारी को तत्काल कार्यमुक्त किया जाए। आदेश में यह भी चेतावनी दी गई थी कि यदि आदेश का पालन नहीं हुआ, तो उपसंचालक के विरुद्ध कड़ी अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाएगी।
23 दिन बीते, कान में जूं तक नहीं रेंगी
मंत्री के इस कड़े आदेश और चेतावनी को आए 23 दिन से अधिक का समय बीत चुका है। लेकिन उपसंचालक डॉ. राजीव शर्मा के कान में जूं तक नहीं रेंग रही है। मंत्री के आदेश की अवहेलना कर वे न सिर्फ अपने पद की गरिमा को गिरा रहे हैं, बल्कि सीधे तौर पर शासन के आदेशों को चुनौती दे रहे हैं।
इस मामले के उजागर होने के बाद अब सवाल उठ रहे हैं कि आखिर एक अदने से एवीएफओ और उपसंचालक के पीछे किस बड़े रसूखदार का हाथ है, जो ये सीधे कैबिनेट मंत्री के आदेश को भी हवा में उड़ा रहे हैं। अब देखने वाली बात ये होगी कि कैबिनेट मंत्री के आदेश को न मानने वाले उपसंचालक पर विभाग क्या कार्रवाई करता है?
उपसंचालक राजीव शर्मा ने बताया कि विभाग के उच्चाधिकारियों के निर्देशानुसार संबंधित कर्मचारी को फिलहाल कार्यमुक्त नहीं किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि विभाग को जो निर्देश प्राप्त हुए हैं, उसी के अनुरूप कार्रवाई की जा रही है।




