रायपुर। नवा रायपुर में आयोजित अखिल भारतीय गोंडवाना गोंड महासभा की कार्यशाला में कैबिनेट मंत्री रामविचार नेताम और मंडला सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते शामिल हुए। कार्यक्रम में मंत्री रामविचार नेताम ने कहा कि कार्यशाला में पीएम जनमन योजना, धरती आबा ग्राम उत्कर्ष योजना, संस्कृति, इतिहास और आदिवासी समाज के विकास जैसे विषयों पर व्यापक चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि गोंडी भाषा बहुत बड़े भूभाग में बोली जाती है। बस्तर, महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और ओडिशा के कई हिस्सों में गोंडी बोलने वाले लोग हैं। ऐसे में समाज की ओर से गोंडी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग रखी गई है।

आदिवासी समाज धर्म कोड की करेगा मांग – सांसद कुलस्ते
मंडला सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते ने आदिवासी धर्म कोड की मांग पर बड़ा बयान देते हुए कहा कि जब पूरे देश का आदिवासी समाज एकमत होकर धर्म कोड की मांग करेगा, तभी इस पर प्रभावी ढंग से बात हो सकेगी। उन्होंने कहा कि वर्तमान में भील, गोंड, संथाल, मुंडा और उरांव समेत विभिन्न आदिवासी समुदाय अलग-अलग मांग रखते हैं। ऐसे में सरकार के सामने भी अलग-अलग विषय आते हैं। जब पूरा आदिवासी समाज एकजुट होकर धर्म कोड की मांग करेगा, तब सरकार से इसे लागू करने की बात की जाएगी।

पांचवीं अनुसूची के प्रावधानों का लाभ आदिवासी समाज तक पहुंचाने का होगा काम- कुलस्ते
यूसीसी (UCC) को लेकर फग्गन सिंह कुलस्ते ने कहा कि पांचवीं अनुसूची पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस इस मुद्दे पर राजनीति कर रही है। साथ ही कहा कि पांचवीं अनुसूची के प्रावधानों का लाभ आदिवासी समाज तक पहुंचाने के लिए काम किया जाएगा।
सरेंडर नक्सलियों के राजनीति में आने के सवाल पर कुलस्ते ने कहा कि लोकतंत्र में हर व्यक्ति को राजनीति करने का अधिकार है। कौन किस विजन के साथ चुनाव लड़ता है, यह उसका निर्णय है। उन्होंने कहा कि पहले लड़ाई वामपंथी विचारधारा से थी, लेकिन अब परिस्थितियां बदल चुकी हैं और आदिवासी समाज का किसी भी तरह इस्तेमाल नहीं होना चाहिए।




