रायपुर। राजधानी में रविवार को इनकम टैक्स विभाग ने हिस्ट्रीशीटर वीरेंद्र तोमर और रोहित तोमर के ठिकानों पर बड़ी छापेमारी की है। यह कार्रवाई टैक्स चोरी, बेनामी संपत्ति और अवैध सूदखोरी की जांच के सिलसिले में की गई। छापेमारी के दौरान रायपुर नगर निगम की टीम भी मौजूद रही, जो की संपत्ति से जुड़े दस्तावेजों की जांच कर रही है।
करोड़ों की वसूली सूदखोरी से
जांच में सामने आया है कि वीरेंद्र और रोहित तोमर ने शहर में सूदखोरी का बड़ा नेटवर्क खड़ा कर रखा था। उन्होंने कई लोगों को ऊंची ब्याज दर पर कर्ज देकर उनसे करोड़ों रुपये वसूले। दोनों भाई पिछले 7 दिनों से फरार हैं और पुलिस को उनके मददगारों की तलाश है।
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मकान निर्माण और टैक्स संबंधी दस्तावेजों की जांच
जोन 8 के कमिश्नर हितेंद्र यादव ने जानकारी दी कि वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर नगर निगम की टीम ने वीरेंद्र तोमर के घर जाकर मकान निर्माण से जुड़े दस्तावेज मांगे है। जांच की जा रही है कि मकान के लिए जरूरी अनुमतियाँ ली गई थीं या नहीं, और निर्माण की वास्तविक लागत क्या है।
करोड़ों की संपत्ति जब्त, हथियार भी बरामद
वहीँ बीते दिनों पुलिस टीम के द्वारा की गई छापेमारी में 37 लाख रुपये नकद, 734 ग्राम सोने के आभूषण, 125 ग्राम चांदी, चार लग्जरी गाड़ियाँ, आई-पैड, लैपटॉप, चेक बुक, एटीएम कार्ड, नोट गिनने की मशीन, पांच तलवारें, एक रिवॉल्वर, एक पिस्टल, जिंदा राउंड और आवाजी कारतूस जब्त किए गए हैं।
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डरा-धमका कर वसूली, आवाज़ी कारतूस से करते थे भय पैदा
पुलिस को संदेह है कि ये कारतूस सिर्फ धमकाने के लिए रखे गए थे। वीरेंद्र और रोहित तोमर कर्जदारों को डराने के लिए अवैध हथियारों और आवाज़ी कारतूस का इस्तेमाल करते थे।
पुलिस रिमांड में भतीजा, लेकिन टालमटोल
छापेमारी के दौरान पुलिस ने वीरेंद्र और रोहित के भतीजे दिव्यांश प्रताप तोमर को भी रिमांड में लिया था। उससे दो दिन तक पूछताछ की गई, लेकिन हर सवाल पर उसने यही कहा कि “सब चाचा को पता है।” पुलिस को शक है कि परिवार के अन्य सदस्य भी सूदखोरी और संपत्ति के लेन-देन में शामिल हैं।
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पीड़ितों को मिल रहा हौसला, शिकायतें दर्ज
पुलिस कार्रवाई के बाद अब पीड़ित सामने आकर शिकायत कर रहे हैं। नारायणपुर जिले के एक व्यक्ति ने बताया कि उसने 10 लाख रुपये का कर्ज लिया था लेकिन ब्याज सहित 1.10 करोड़ रुपये चुका चुका है, फिर भी रोहित उसे धमका रहा था। पुलिस ने इस शिकायत को दर्ज कर लिया है और कई अन्य पीड़ित भी सामने आने की तैयारी में हैं।
अपराधियों की मददगारों की तलाश
पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि वीरेंद्र और रोहित को जेल के अंदर और बाहर किन-किन लोगों ने सहयोग किया। यह भी जांच हो रही है कि उनकी बेनामी संपत्तियाँ किसके नाम पर हैं। जांच एजेंसियाँ उनके करीबियों की कुंडली खंगाल रही हैं।




