रायपुर/बिलासपुर। नया रायपुर एयरपोर्ट विस्तार के लिए अधिग्रहित जमीन के मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने किसानों के पक्ष में बड़ा फैसला सुनाया है। जस्टिस रजनी दुबे और जस्टिस ए.के. प्रसाद की डिवीजन बेंच ने आदेश दिया है कि किसानों को 17 लाख रुपए प्रति हेक्टेयर की बजाय 25 लाख रुपए प्रति हेक्टेयर की दर से मुआवजा दिया जाए। साथ ही अतिरिक्त 12% वार्षिक राशि, 30% क्षतिपूर्ति और कब्जा लेने की तारीख से ब्याज देने का भी निर्देश दिया गया है।
क्या है मामला
वर्ष 2011 में राज्य सरकार ने नया रायपुर एयरपोर्ट विस्तार के लिए बरौद और आसपास के गांवों की करीब 95 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण किया था। अधिसूचना अगस्त 2011 में जारी हुई और जून 2012 में किसानों को 17 लाख रुपए प्रति हेक्टेयर (असिंचित भूमि) और 18.25 लाख रुपए प्रति हेक्टेयर (सिंचित भूमि) के हिसाब से मुआवजा तय किया गया।
किसानों ने इसे कम बताते हुए आपत्ति दर्ज की, लेकिन वर्ष 2019 में उनकी मांग खारिज कर दी गई। इसके बाद प्रकाश चंद्र शर्मा, मोहन, रामेश्वर सहित अन्य किसानों ने 2020 में हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
Read Also- रायपुर में 1 सितम्बर से बिना हेलमेट नहीं मिलेगा पेट्रोल, विवाद किया तो होगी सख्त कार्रवाई
किसानों की दलील
किसानों ने कोर्ट में कहा कि अधिग्रहण से पहले वर्ष 2010 में एनआरडीए ने इसी गांव की जमीन 35 लाख रुपए प्रति हेक्टेयर की दर से खरीदी थी, फिर भी उन्हें आधी दर पर मुआवजा दिया गया। किसानों ने यह भी कहा कि उनकी जमीन सिंचित है और हाईवे से सटी हुई है, इसलिए वास्तविक मूल्य कहीं अधिक है।
हाईकोर्ट का फैसला
हाई कोर्ट ने किसानों की दलीलों को उचित मानते हुए कहा कि एनआरडीए खुद ऊंची दर पर जमीन खरीद चुका है, ऐसे में किसानों को कम दर पर भुगतान करना अन्यायपूर्ण और भेदभावपूर्ण है। कोर्ट ने सभी अपीलें स्वीकार करते हुए भूमि का मूल्य 25 लाख रुपए प्रति हेक्टेयर तय किया और छह माह के भीतर मुआवजा राशि, ब्याज और वैधानिक लाभ किसानों को देने का आदेश दिया।
Read Also- सनसनीखेज वारदात: संबंध बनाने के बाद पति ने रॉड से हमला कर पत्नी की ली जान
सरकार का पक्ष
राज्य सरकार और एनआरडीए ने दलील दी थी कि अधिग्रहण उस समय की गाइडलाइन के अनुसार हुआ था। बिक्री पर प्रतिबंध होने से तीन साल का औसत बाजार मूल्य उपलब्ध नहीं था, इसलिए उप पंजीयक की गाइडलाइन दर के आधार पर मुआवजा तय किया गया था।




