नई दिल्ली: देश के 17वें उपराष्ट्रपति पद के लिए हुए चुनाव में एनडीए उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन ने विपक्ष के ‘इंडिया’ ब्लॉक प्रत्याशी बी. सुदर्शन रेड्डी को हराकर बड़ी जीत दर्ज की है। उन्होंने 152 वोटों के अंतर से चुनाव जीता है। हालांकि, उनकी जीत का अंतर पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के मुकाबले कम रहा।
राज्यसभा महासचिव और निर्वाचन अधिकारी पीसी मोदी ने चुनाव परिणाम की घोषणा करते हुए बताया कि कुल 781 सांसदों में से 767 ने मतदान किया। इनमें से 752 मत वैध पाए गए, जबकि 15 मत अवैध रहे। राधाकृष्णन को 452 और रेड्डी को 300 वोट मिले।
एनडीए को उम्मीद से अधिक 25 वोट ज्यादा मिले, जबकि ‘इंडिया’ ब्लॉक को उसकी कुल संख्या से 15 वोट कम मिले। इससे स्पष्ट है कि विपक्ष के कुछ सांसदों ने क्रॉस वोटिंग की है। यह सत्ता पक्ष के लिए राजनीतिक सफलता और विपक्ष के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
2022 की तुलना में कमजोर मार्जिन
2022 में जगदीप धनखड़ को 528 वोट मिले थे, जबकि इस बार राधाकृष्णन को 452 वोट मिले। यानी उन्हें 76 वोट कम मिले। धनखड़ ने 346 वोटों से जीत दर्ज की थी, जबकि राधाकृष्णन ने 152 वोटों से। यह अंतर 14 फीसदी का है।
विपक्ष की एकजुटता पर सवाल
हालांकि ‘इंडिया’ ब्लॉक ने एकजुट होकर उम्मीदवार उतारा था, लेकिन वह अपने सभी सांसदों को साध नहीं पाया। कांग्रेस ने तेलुगु अस्मिता को साधने के लिए गैर-राजनीतिक चेहरा उतारा, लेकिन बीआरएस, बीजेडी और अकाली दल जैसे दलों का समर्थन नहीं मिल सका। टीडीपी, वाईएसआर कांग्रेस और जन सेना पार्टी ने एनडीए का समर्थन कर विपक्ष की रणनीति को कमजोर कर दिया।
बीजेपी की रणनीति रही कारगर
बीजेपी ने सभी सहयोगी दलों को एकजुट रखते हुए विपक्ष के भीतर भी सेंधमारी की। कई विपक्षी सांसदों ने एनडीए उम्मीदवार के पक्ष में मतदान किया, जिसे बीजेपी ने “अंतरात्मा की आवाज” बताया है। लोकसभा में बीजेपी के मुख्य सचेतक संजय जायसवाल ने कहा कि राधाकृष्णन को विपक्ष से भी समर्थन मिला, जिससे उनकी जीत और बड़ी हो गई।
विपक्ष का पलटवार
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि विपक्ष पूरी तरह एकजुट था और यह जीत केवल अंकगणितीय है, नैतिक नहीं। कांग्रेस नेता राजेश ठाकुर ने आरोप लगाया कि बीजेपी केवल वोट चोरी नहीं, बल्कि डकैती में शामिल है।
राजनीतिक संकेत स्पष्ट
राधाकृष्णन की जीत से यह स्पष्ट हो गया है कि संसद में एनडीए अब भी मजबूत स्थिति में है, जबकि विपक्षी एकता में दरार है। यह चुनाव 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद पहली बड़ी राजनीतिक परीक्षा थी, जिसमें एनडीए को मनोवैज्ञानिक बढ़त मिलती दिख रही है।




