नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर कर H-1B वीजा के नियमों में बदलाव किया। नए नियम के तहत कंपनियों को विदेशी कर्मचारियों को हायर करने के लिए 100,000 डॉलर की फीस देनी होगी। आदेश में कहा गया कि H-1B वीजा का दुरुपयोग अमेरिकी कर्मचारियों के वेतन को कम कर रहा है, युवाओं को नौकरियों से वंचित कर रहा है और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर रहा है।
नए नियम कब से लागू?
राष्ट्रपति के कार्यकारी आदेश के अनुसार, H-1B वीजा के नए नियम 21 सितंबर 2025 से लागू होंगे। यह अमेरिकी समयानुसार 21 सितंबर की रात 12 बजे से प्रभावी होगा, जो भारत में 22 सितंबर सुबह 9:30 बजे होगा। यह नियम फिलहाल एक साल तक लागू रहेगा। गृह सुरक्षा विभाग और विदेश मंत्रालय इसकी निगरानी करेंगे।
फीस से छूट और राष्ट्रीय हित
आदेश में स्पष्ट किया गया कि अगर कोई कंपनी 100,000 डॉलर की फीस का भुगतान नहीं करती, तो उसकी H-1B याचिका स्वीकार नहीं होगी। कार्यकारी आदेश में यह भी उल्लेख है कि फीस में छूट की कोई व्यवस्था नहीं होगी। राष्ट्रीय हित (नेशनल इंटरेस्ट) का पैमाना गृह सुरक्षा विभाग द्वारा तय किया जाएगा, जिसमें कर्मचारी की विशेषज्ञता और अमेरिकी अर्थव्यवस्था में योगदान को प्राथमिकता दी जाएगी।
इस फैसले से टेक्नोलॉजी कंपनियों पर असर पड़ सकता है, जो H-1B वीजा पर निर्भर हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे विदेशी प्रतिभाओं को आकर्षित करना मुश्किल हो सकता है।




