नई दिल्ली. फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म ज़ोमैटो ने रेस्टोरेंट उद्योग के साथ लंबे समय से चल रही खींचतान को समाप्त करते हुए ग्राहकों के फोन नंबर रेस्टोरेंट्स को उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है। इस फैसले के बाद आशंका जताई जा रही है कि ग्राहकों के इनबॉक्स में जल्द ही प्रचार संदेशों की संख्या बढ़ सकती है।
कंपनी के इस कदम ने डेटा प्राइवेसी और ग्राहक जानकारी के संभावित दुरुपयोग को लेकर राजनीतिक और उद्योग विशेषज्ञों के बीच बहस छेड़ दी है। पाँच लाख से अधिक रेस्टोरेंट्स का प्रतिनिधित्व करने वाले नेशनल रेस्टोरेंट्स एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया के साथ ज़ोमैटो की बातचीत जारी है। रिपोर्टों के अनुसार, इसी तरह की बातचीत स्विगी के साथ भी चल रही है।
क्यों विवाद में है नया निर्णय
फिलहाल डिलीवरी प्लेटफॉर्म ग्राहक की व्यक्तिगत जानकारी को मास्क करके रेस्टोरेंट्स को ऑर्डर विवरण भेजते हैं, जिससे फोन नंबर या अन्य निजी डिटेल्स साझा नहीं होतीं। लेकिन पायलट प्रोजेक्ट के तहत ज़ोमैटो ग्राहकों को एक पॉप-अप भेज रहा है, जिसमें रेस्टोरेंट द्वारा मार्केटिंग और प्रचार संदेश प्राप्त करने के लिए फोन नंबर साझा करने की अनुमति मांगी जा रही है।
डेटा सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह व्यवस्था ग्राहकों की निजता पर असर डाल सकती है और जानकारी के दुरुपयोग की आशंका बढ़ा सकती है। वहीं, रेस्टोरेंट उद्योग का तर्क है कि ग्राहक से सीधे संपर्क होने पर सेवा बेहतर होगी और व्यवसाय को बढ़ावा मिलेगा।
ग्राहकों की प्रतिक्रिया और सरकारी नियामकों की दिशा के बाद ही स्पष्ट होगा कि यह कदम उद्योग और उपभोक्ताओं के लिए किस हद तक लाभकारी या चुनौतीपूर्ण साबित होगा।




