Bijapur Latest Big News : बीजापुर ज़िले के उसूर थाना क्षेत्र के नडपल्ली गांव में हुए अत्याचार मामले की जाँच करने पहुँचा कांग्रेस का छः सदस्यीय दल।जाँच दल में बस्तर के विधायक लखेश्वर बघेल को संयोजक, बीजापुर विधायक विक्रम मंडावी, नारायणपुर पूर्व विधायक चंदन कश्यप, श्रीमती नीना रावतिया उद्दे , शंकर कुड़ियम एवं लालू राठौर को जाँच दल का सदस्य बनाया गया था।

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ग्रामीणों ने जांच दल को बताया कि 5 जुलाई की देर रात सुरक्षा बलों ने पूरे नडपल्ली गांव को घेर लिया और गांव के बुजुर्ग और महिलाओं की छोड़कर 95 लोगों को रात 4 बजे पुलिस थाने उसूर लाया गया जिनमे पढ़ाई करने वाले छात्र, किसान, बीमारी से पीड़ित मरीज़ शामिल थे बाद में कुछ लोगों को छोड़ दिया गया। लखेश्वर बघेल ने प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि रात 4 बजे ग्रामीणों को थाना लाया जाना दुर्भाग्य जनक है, यह अपने आप में ऐसी पहली घटना होगी जिसमें पुलिस ने पूरे गांव वालों को नक्सलियों के नाम पर थाना लाया गया और उन्हें प्रताड़ित किया गया।

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उन्होंने प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि प्रदेश में जब से भाजपा की सरकार बनी है तब से आदिवासियों पर अत्याचार और प्रताड़ना की घटनायें बढ़ी है जिस तरह से नडपल्ली गांव के लोगों को पुलिस थाने में लाकर प्रताड़ित किया जा रहा है इससे तो यही लगता है कि नक्सलियों की आड़ में भाजपा सरकार षड्यंत्रपूर्वक आदिवासियों को ख़त्म करना चाहती है। 15 दिन पहले IED ब्लास्ट में अपने दोनों पैर खो देने वाली महिला का ज़िक्र करते हुए विधायक लखेश्वर बघेल ने कहा कि जिस महिला ने IED ब्लास्ट में अपने दोनों पैर गवाईं है पुलिस उसी के बेटे को नक्सली बता कर उठा रही है इससे बड़ी विडंबना और क्या हो सकती है।

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लखेश्वर बघेल ने आगे कहा कि भाजपा सरकार को यह बताना चाहिए कि ऐसी कौन सी मुसीबत आ रही थी कि पुलिस ने रात 4 बजे पूरे गांव के लोगों को उठाकर थाने ले आई है? जबकि पुलिस थाना और नडपल्ली गांव के इर्द गिर्द सुरक्षा बलों के दो कैम्प भी है। आख़िर नक्सलियों के आड़ में आदिवासी कब तक प्रताड़ित होते रहेंगे? भाजपा सरकार एक तरफ़ कहती है कि अब नक्सली ख़त्म हो गए है और वही दूसरी तरफ़ नक्सलियों के नाम पर पूरे गांव वालों को उठा लिया जाता है।
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वहीं प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए बीजापुर के विधायक विक्रम मंडावी ने कहा कि नक्सलियों के नाम पर लगातार प्रताड़ना से परेशान होकर आदिवासी अब अन्य राज्यों में पलायन कर रहे है भाजपा सरकार के पास आदिवासियों के लिए कोई योजना नहीं है और कोई नीति नहीं है। भाजपा सरकार के छः माह के शासन में उसकी कथनी और करनी को समझा जा सकता है भाजपा वास्तव में आदिवासी विरोधी है जब से प्रदेश में भाजपा की सरकार बनी है तब से लगातार आदिवासी ही प्रताड़ित हो रहे है।




