रायपुर, छत्तीसगढ़: धर्मांतरण के मुद्दे पर छत्तीसगढ़ में सियासी सरगर्मी के बीच मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कड़ा रुख अपनाते हुए बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा, “छत्तीसगढ़ के लिए धर्मांतरण एक कलंक है। इसे रोकने के लिए अंतिम लड़ाई जारी है, और इसके खिलाफ ठोस कदम उठाए जाएंगे।” साय का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब हाल ही में दुर्ग में धर्मांतरण और मानव तस्करी के आरोप में केरल की दो ननों की गिरफ्तारी ने दिल्ली से लेकर रायपुर तक सियासी तूफान खड़ा कर दिया था।
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मामले की पृष्ठभूमि
पिछले सप्ताह दुर्ग पुलिस ने केरल की दो ननों को धर्मांतरण और मानव तस्करी के आरोप में गिरफ्तार किया था। पुलिस के मुताबिक, दोनों नन कथित तौर पर स्थानीय आदिवासी समुदायों को प्रलोभन देकर धर्मांतरण के लिए प्रेरित कर रही थीं। इस घटना ने सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और विपक्षी दलों के बीच तीखी बहस को जन्म दिया। बीजेपी ने इसे छत्तीसगढ़ में बढ़ते धर्मांतरण का सबूत बताया, जबकि कांग्रेस ने इसे आदिवासी समुदाय के खिलाफ साजिश करार दिया।
ननों को मिली जमानत
शनिवार, 2 अगस्त 2025 को एनआईए कोर्ट ने दोनों ननों को जमानत दे दी, जिसके बाद उन्हें जेल से रिहा कर दिया गया। इस फैसले ने एक बार फिर धर्मांतरण के मुद्दे को सुर्खियों में ला दिया। बीजेपी नेताओं ने कोर्ट के फैसले पर सधे हुए शब्दों में प्रतिक्रिया दी, जबकि विपक्ष ने इसे अपनी जीत बताया।




