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तेल की कीमतों में वृद्धि:- 30 सितंबर 2023 को, ब्रेंट क्रूड का दाम 71.81 डॉलर प्रति बैरल था. लेकिन 7 अक्टूबर तक यह बढ़कर 80 डॉलर के पार चला गया. इसका मतलब है कि तेल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं.
भारत पर असर:- भारत कच्चे तेल का सबसे बड़ा आयातक है. इससे भारत पर तेल आयात का दबाव बढ़ सकता है. वित्त वर्ष 2024-25 में, अप्रैल से अगस्त तक, भारत ने 6,37,976.02 करोड़ रुपये का पेट्रोलियम आयात किया. यह पिछले साल की तुलना में 10.77 प्रतिशत अधिक है.
ईरान का समर्थन :- इजरायल की कार्रवाई के खिलाफ ईरान ने समर्थन दिया है. इससे कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आ रही है. ईरान और पश्चिम एशिया के अन्य देश बड़े पेट्रोलियम निर्यातक हैं. इन देशों में लड़ाई बढ़ने का मतलब है कि तेल की सप्लाई पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा.
भारत की तेल आयात निर्भरता :- भारत एक शुद्ध पेट्रोलियम आयातक है. इसका मतलब है कि भारत को कच्चे तेल और अन्य ऊर्जा उत्पादों के लिए दूसरे देशों पर निर्भर रहना पड़ता है.
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आने वाला समय :- अगर तेल की कीमतें बढ़ती रहीं, तो आने वाले समय में भारत के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं. इससे महंगाई भी बढ़ सकती है. इस प्रकार, इजरायल और ईरान के बीच का तनाव न केवल उन देशों के लिए, बल्कि भारत जैसे देशों के लिए भी आर्थिक चुनौतियां पैदा कर रहा है. अगर स्थिति जल्दी सामान्य नहीं होती, तो इसका असर व्यापक रूप से महसूस किया जाएगा.




