बिलासपुर। गुरुवार रात से शुक्रवार दोपहर तक हुई लगातार मूसलाधार बारिश ने बिलासपुर शहर की रफ्तार थाम दी। करीब दो दशक बाद शहर में बाढ़ जैसे हालात देखने को मिले। लगातार बारिश के कारण कई प्रमुख सड़कें, कॉलोनियां और निचले इलाके जलमग्न हो गए, जिससे जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हुआ और लोगों का घरों से निकलना मुश्किल हो गया।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने स्कूलों में अवकाश घोषित कर दिया। वहीं रेलवे ट्रैक पर पानी भरने से पांच मेमू (MEMU) ट्रेनें रद्द करनी पड़ीं, जबकि तीन ट्रेनों का रूट परिवर्तित किया गया।
SDRF ने चलाया राहत एवं बचाव अभियान
सरकंडा, चांटीडीह और अन्य निचले इलाकों में पानी तेजी से भरने के बाद SDRF की टीम ने राहत एवं बचाव अभियान चलाया। सरकंडा के बंधवापारा में दो नावों की मदद से 40 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। वहीं दोमुहानी क्षेत्र में 10 से अधिक घर चारों ओर से पानी से घिर गए, जिससे कई परिवार रातभर फंसे रहे। सूचना मिलने पर प्रशासन और राहत दल मौके पर पहुंचे और लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला।
बिजली और पेयजल आपूर्ति पर असर
भारी जलभराव के कारण कई स्थानों पर ट्रांसफॉर्मर पानी में डूब गए, जिससे शहर के कई इलाकों की बिजली आपूर्ति बाधित हो गई। बिजली बंद होने से पेयजल आपूर्ति भी प्रभावित हुई और लोगों को पानी की परेशानी का सामना करना पड़ा। बिजली विभाग की टीमें आपूर्ति बहाल करने में जुटी हैं।
कलेक्टर के सरकारी बंगले में भी घुसा पानी
भारी बारिश का असर प्रशासनिक परिसरों पर भी देखने को मिला। बिलासपुर कलेक्टर के सरकारी बंगले में पानी भर जाने के बाद नगर निगम की टीम ने मौके पर पहुंचकर जल निकासी का कार्य शुरू किया। निगम की मशीनें लगातार पानी निकालने में लगी रहीं।
नेशनल हाईवे पर यातायात प्रभावित
बिलासपुर-जांजगीर नेशनल हाईवे पर दर्रीघाट के पास जलभराव के कारण यातायात बाधित हो गया। सड़क पर वाहनों की लंबी कतार लग गई। वहीं अपोलो अस्पताल के पास भी पानी भरने से लोग घंटों तक फंसे रहे। बारिश कम होने के बाद हालात धीरे-धीरे सामान्य होने लगे, हालांकि प्रशासन अभी भी अलर्ट मोड पर है।
अधिवक्ता संघ ने न्यायालय से की विशेष आग्रह
लगातार बारिश को देखते हुए जिला अधिवक्ता संघ ने मुख्य जिला एवं सत्र न्यायाधीश को पत्र लिखकर अनुरोध किया कि शुक्रवार को किसी भी मामले में पक्षकारों और अधिवक्ताओं की अनुपस्थिति के कारण प्रतिकूल आदेश पारित न किए जाएं। संघ ने बताया कि भारी बारिश की वजह से न्यायालय में उपस्थिति काफी कम रही। जानकारी के अनुसार, जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने इस अनुरोध पर सहमति जताई है।





