उज्खजैन। गोलीय नजरिए से साल 2026 खास तो है, लेकिन भारत के लिए थोड़ा फीका रहेगा। वजह साफ है—पूरे साल में होने वाले चार ग्रहणों में से भारतीय आकाश में सिर्फ एक ही ग्रहण दिखेगा। यह जानकारी उज्जैन की शासकीय जीवाजी वेधशाला के अधीक्षक डॉ. राजेंद्र प्रकाश गुप्त ने दी है।
डॉ. गुप्त के मुताबिक, साल की शुरुआत 17 फरवरी को आंशिक सूर्य ग्रहण से होगी। ग्रहण लंबा होगा, करीब साढ़े चार घंटे तक चलेगा, लेकिन भारत के लिए यह पूरी तरह अदृश्य रहेगा। यह खगोलीय घटना अर्जेंटीना, चिली, दक्षिण अफ्रीका और अंटार्कटिका के आसमान में नजर आएगी।
इसके बाद 3 मार्च 2026 को साल का दूसरा ग्रहण पड़ेगा, जो पूर्ण चंद्र ग्रहण होगा। कागजों में यह भारत में दृश्य माना गया है और यही 2026 का इकलौता ग्रहण है, जो भारत से जुड़ता है। हालांकि हकीकत थोड़ी अलग है। उज्जैन समेत कई हिस्सों में चंद्रमा ग्रहण की अवस्था में उदय करेगा और सूर्यास्त के कुछ ही मिनटों बाद ग्रहण समाप्त हो जाएगा। यानी चंद्रमा ठीक से दिखे, उससे पहले ही ग्रहण खत्म।
साल का तीसरा ग्रहण 12–13 अगस्त की रात पूर्ण सूर्य ग्रहण के रूप में होगा। यह एक बड़ी खगोलीय घटना होगी, लेकिन भारत फिर खाली हाथ रहेगा। यह ग्रहण पश्चिमी यूरोप, अफ्रीका के कुछ हिस्सों, उत्तरी अमेरिका और महासागरीय क्षेत्रों में देखा जाएगा।
वर्ष का आखिरी ग्रहण 28 अगस्त को आंशिक चंद्र ग्रहण होगा। यह भी भारत में दिखाई नहीं देगा, हालांकि एशिया, यूरोप, अफ्रीका और कई महासागरों में इसके दर्शन होंगे।
निष्कर्ष साफ है—2026 में ग्रहणों की संख्या भले चार हो, लेकिन भारतीय आकाश प्रेमियों को संतोष सिर्फ एक चंद्र ग्रहण से करना पड़ेगा, वो भी सीमित दृश्यता के साथ। खगोल के शौकीनों के लिए यह साल उत्सुकता से ज्यादा इंतजार वाला रहेगा।




