नई दिल्ली। भारतीय वायुसेना (IAF) को 97 और स्वदेशी एलसीए तेजस मार्क-1ए (Tejas Mark-1A) लड़ाकू विमान मिलने जा रहे हैं। 62,000 करोड़ रुपये की इस डील को मंगलवार को हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में मंजूरी दी गई। इसके साथ ही हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) को इन विमानों के बड़े पैमाने पर उत्पादन का रास्ता साफ हो गया है।
मिग-21 की जगह लेगा तेजस
सरकार ने आने वाले हफ्तों में वायुसेना के पुराने मिग-21 बेड़े को चरणबद्ध तरीके से हटाने का फैसला किया है। इनकी जगह आधुनिक स्वदेशी तेजस मार्क-1ए लेंगे। यह चौथी पीढ़ी का बहुउद्देशीय लड़ाकू विमान है, जिसमें आधुनिक एवियोनिक्स और रडार सिस्टम लगे हैं।
दूसरा बड़ा ऑर्डर
इससे पहले सरकार ने 48,000 करोड़ रुपये की लागत से 83 तेजस मार्क-1ए का ऑर्डर दिया था। नए आदेश के साथ भारतीय वायुसेना के पास अब कुल 180 तेजस मार्क-1ए विमान होंगे। यह HAL के लिए अब तक का सबसे बड़ा प्रोडक्शन ऑर्डर है।
मेक इन इंडिया को बढ़ावा
तेजस का 65% हिस्सा पूरी तरह स्वदेशी है। इस डील से देश के छोटे और मध्यम उद्यमों (SMEs) को रक्षा क्षेत्र में नए अवसर मिलेंगे। यह कदम “मेक इन इंडिया” और “आत्मनिर्भर भारत” की दिशा में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है।
तेजस मार्क-1ए की खासियत
- एडवांस एवियोनिक्स व रडार – लंबी दूरी के युद्ध और निगरानी की क्षमता।
- 65% स्वदेशी सामग्री – भारत की तकनीकी क्षमता को दर्शाता है।
- डेल्टा-विंग डिजाइन – हल्का, तेज और दुश्मन के रडार पर पकड़ना मुश्किल।
- हथियारों की क्षमता – आर-73 क्लोज कॉम्बैट मिसाइल, डर्बी BVR मिसाइल और सटीक बम ले जाने में सक्षम।
भविष्य की तैयारी
फिलहाल भारतीय वायुसेना के दो स्क्वाड्रन तेजस का संचालन कर रहे हैं। आने वाले वर्षों में यह संख्या कई गुना बढ़ेगी। इसके अलावा, HAL को भविष्य में 200 से अधिक तेजस मार्क-2 और एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) के ऑर्डर मिलने की भी संभावना है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद हाल ही में तेजस ट्रेनर विमान में उड़ान भर चुके हैं, जो किसी भी भारतीय प्रधानमंत्री की लड़ाकू विमान में पहली उड़ान थी। इसे भारत की एयरोस्पेस तकनीक की बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।




