रायपुर। आयुष्मान भारत योजना के तहत लंबित दावों को लेकर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) की कड़ी चेतावनी और विपक्षी हमलों के बीच आखिरकार प्रदेश सरकार को झुकना पड़ा। स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने बुधवार को घोषणा की कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए प्रावधानित राशि में से 375 करोड़ रुपये की पहली किस्त जारी कर दी गई है और निजी अस्पतालों को भुगतान की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
IMA की चेतावनी का असर
IMA ने कुछ दिन पहले ही साफ कर दिया था कि अगर बकाया भुगतान नहीं हुआ तो 1 सितंबर से आयुष्मान योजना के तहत इलाज बंद कर दिया जाएगा। इस अल्टीमेटम के बाद कई अस्पतालों ने योजना के मरीजों का इलाज रोक भी दिया था। इससे लाखों लोगों के सामने संकट खड़ा हो गया था।
सरकार पर विपक्ष का हमला
IMA की चेतावनी के तुरंत बाद कांग्रेस ने इस मुद्दे को जनता के हितों से जोड़कर सरकार को कठघरे में खड़ा किया। विपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार की लापरवाही के कारण गरीब मरीज इलाज से वंचित हो रहे हैं और निजी अस्पताल आर्थिक संकट में फंस रहे हैं।
सरकार का बचाव, पर बकाया बाकी
स्वास्थ्य मंत्री जायसवाल ने सफाई देते हुए कहा कि सरकार नागरिकों के हितों के प्रति सजग है और अस्पतालों को चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। लेकिन IMA का कहना है कि अब भी 750 करोड़ रुपये से ज्यादा बकाया है। छह माह से भुगतान नहीं होने के चलते अस्पतालों की स्थिति गंभीर बनी हुई है।
बैकफुट पर सरकार
निजी अस्पतालों की नाराजगी और IMA की कड़ी चेतावनी के बाद सरकार दबाव में आई और आनन-फानन में 375 करोड़ की पहली किस्त जारी करनी पड़ी। लेकिन जब तक पूरे बकाया का भुगतान नहीं होता, तब तक संकट टलने वाला नहीं है।




