Close Menu
KhabarwaadKhabarwaad
    Top Posts

    सेन शक्ति सम्मेलन एवं केश शिल्पी सम्मान समारोह में शामिल हुए मुख्यमंत्री, समाज को सामुदायिक भवन निर्माण के लिए 50 लाख रुपये प्रदान करने की घोषणा की

    August 8, 2026

    न्याय के मंदिरों तक हर व्यक्ति की पहुंच सुनिश्चित करना सरकार की प्रतिबद्धता: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

    August 8, 2026

    छत्तीसगढ़ शिक्षा विभाग में बंपर तबादला : 700 शिक्षक हुए इधर से उधर, देखें जंबो लिस्ट…

    August 8, 2026
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Trending
    • सेन शक्ति सम्मेलन एवं केश शिल्पी सम्मान समारोह में शामिल हुए मुख्यमंत्री, समाज को सामुदायिक भवन निर्माण के लिए 50 लाख रुपये प्रदान करने की घोषणा की
    • न्याय के मंदिरों तक हर व्यक्ति की पहुंच सुनिश्चित करना सरकार की प्रतिबद्धता: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव
    • छत्तीसगढ़ शिक्षा विभाग में बंपर तबादला : 700 शिक्षक हुए इधर से उधर, देखें जंबो लिस्ट…
    • बड़े पैमाने पर डीएफओ का तबादला, देखें लिस्ट…
    • भगवान शिव पर अभद्र टिप्पणी मामले में अरुण पन्नालाल की जमानत याचिका खारिज; 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजे गए जेल
    • छत्तीसगढ़ में ‘हर घर तिरंगा’ और ‘वंदे मातरम्’ अभियान की धूम, 17 अगस्त तक आयोजित होंगे राज्यस्तरीय देशभक्ति कार्यक्रम
    • ड्रग्स के खिलाफ आर-पार की लड़ाई, CM डॉ. मोहन यादव बोले- पूरे नेटवर्क को करेंगे ध्वस्त
    • अरुण पन्नालाल की गिरफ्तारी पर सियासत तेज, अजय चंद्राकर बोले- धर्मांतरण रैकेट की हो उच्चस्तरीय जांच
    Facebook X (Twitter) Instagram
    KhabarwaadKhabarwaad
    Saturday, August 8
    • Home
    • छत्तीसगढ़
      • रायपुर संभाग
      • दुर्ग संभाग
      • बिलासपुर संभाग
      • बस्तर संभाग
      • सरगुजा संभाग
    • मध्यप्रदेश
    • राष्ट्रीय समाचार
    • अपराध
    • राजनीति
    • धर्म एवं समाज
    • अफसरशाही
    • खेल
    • मनोरंजन
    • स्वास्थ्य
    • राशिफल
    • Auto & Gadget
    KhabarwaadKhabarwaad
    Home » न्याय के मंदिरों तक हर व्यक्ति की पहुंच सुनिश्चित करना सरकार की प्रतिबद्धता: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

    न्याय के मंदिरों तक हर व्यक्ति की पहुंच सुनिश्चित करना सरकार की प्रतिबद्धता: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

    Khabarwaad News DeskBy Khabarwaad News DeskAugust 8, 2026 मध्यप्रदेश No Comments12 Mins Read

    भोपाल/इंदौर। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इंदौर में ‘इंहेंसिंग एक्सेस टू जस्टिस’ विषय पर आयोजित वेस्ट जोन रीजनल कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि ‘राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण भारतीय न्याय परंपरा को समृद्ध करने की दिशा में अपने दायित्वों का निर्वहन कर रहा है। आज के इस आयोजन की थीम, एक आवाज, सशक्त भविष्य, गरिमा, समावेशन के माध्यम से न्याय पहुंचना है। न्याय, स्वतंत्रता और बंधुत्व को लोकतंत्र का आधार बनाया गया है। मध्यस्थता के माध्यम से छोटे-छोटे मामलों का निपटारा कर हम केस पेंडेंसी जैसे गंभीर विषयों पर मंथन कर रहे हैं। हमारे लिए न्याय की अवधारणा पंच परमेश्नरों की परंपरा रही है, जिन्होंने कभी समझाइश देकर, कभी समझौतों से विवादों को सहजता से सुलझाया है।

    सीएम ने आगे कहा कि भगवान श्रीकृष्ण के गीता के ज्ञान से भी समाधान का मार्ग दिखाई देता है, उन्होंने भीषण समय टालने के लिए 5 गांवों से समाधान निकालने का प्रयास किया था। हमारे संविधान में हजारों वर्षों की न्याय परंपरा का आधुनिक उत्कृष्ट संगम है। यह देश का न्याय विधान है और हमारे न्यायालय न्याय के मंदिर हैं। भारतीय अदालतों को लोग श्रद्धा से न्याय मिलने के स्थान के रूप में देखते हैं। न्याय की आस में न्यायालय की चौखट पर कदम रखते हैं। राज्य सरकार न्यायपालिका की भावना के अनुसार अपने सभी उपलब्ध संसाधनों के साथ सदैव सभी के लिए न्याय सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।’

    कॉन्फ्रेंस का आयोजन 8 अगस्त को इंदौर के ब्रिलियंट कंवेंशन सेंटर में किया गया। कार्यक्रम में ‘Ensuring Access Protecting Rights Building Futures’  पुस्तक, निवारक एवं रणनीतिक विधिक सेवा योजनाएं, न्याय सबके लिए, निवारक एवं रणनीतिक विधिक सेवा योजनाएं, ब्रेल लिपी में मार्गदर्शिका और न्याय के स्वर का विमोचन किया गया। कार्यक्रम में नेशनल लीगल सर्वसेस अथॉरिटी (नालसा) का थीम सॉन्ग दिखाया गया। सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत ने नालसा शिक्षा स्कीम, नालसा के थीम सॉन्ग को इंडियन साइन लैंग्वेज में लॉन्च किया। कार्यक्रम में मध्यस्थता पर सर्टिफिकेट कोर्स-विवाद से सहमति और जस्टिस टू चिल्ड्रन लिटिगेशन फेलोशिप प्रोग्राम का शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम को न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने भी संबोधित किया।

    कॉन्फ्रेंस में सुप्रीम कोर्ट न्यायधीश जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा, न्यायधीश विजय बिश्वनोई, न्यायधीश आलोक अराधे, न्यायधीश शील नागु, न्यायधीश संजीव सचदेवा, मध्यप्रदेश उच्च न्यायलय के न्यायधीश विवेक अग्रवाल, न्यायधीश आनंद पाठक सहित सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न उच्च न्यायालयों के न्यायाधीश, विधिक सेवा प्राधिकरणों के वरिष्ठ पदाधिकारी, न्यायिक अधिकारी, महापौर पुष्यमित्र भार्गव उपस्थित थे। कार्यक्रम के अंत में मध्यप्रदेश उच्च न्यायलय के न्यायधीश आनंद पाठक ने आभार व्यक्त किया।

    अंग्रेजों के बनाए कानून किए खत्म

    कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में बदलाव का स्वर्णिम समय चल रहा है। हमने अंग्रेजों के दौर के अनेक गैर-जरूरी कानूनों को समाप्त कर न्याय को सुलभ और सरल बनाया है। हमारे लिए आधुनिक समय में ई-केस फाइलिंग, वर्चुअल सुनवाई, डिजिटल डेटा संग्रह, आधुनिक न्याय प्रबंधन जैसी न्याय प्रणाली लागू की गई है। औपनिवेशक दौर के कानूनों के स्थान पर जो कानून लागू किए गए हैं, वे इसी कड़ी में जनविश्वास अधिनियम के माध्यम से छोटे उल्लंघनों को अपराध की श्रेणी से बाहर कर न्याय को अधिक सरल और नागरिक हितैषी बनाते हैं। राज्य सरकार भी इसी दिशा में आगे बढ़ रही है।

    उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने सभी तरह के प्रबंधन किए हैं। अभी कुछ दिन पहले ही अनुच्छेद 44 के माध्यम से राज्य के सभी नागरिकों के लिए एक समान नागरिक संहिता (यूसीसी) से संबंधित विधेयक विधानसभा में पारित किया है। इसे पूर्व न्यायधीश रंजना देसाई के नेतृत्व में बनी समिति के सुधावों पर तैयार किया गया है। राज्य सरकार ने अपनी प्रतिबद्धता सिद्ध की है कि न्याय में सभी धर्मों का सम्मान होगा और सर्वधर्म सद्भाव बनाए रखने के लिए सरकार हिंदू-मुस्लिम-सिख और ईसाई किसी धर्म में भेदभाव नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी के लिए प्रतिबद्धता दिखाते हुए हमने पेपर लीक, धोखाधड़ी के मामले में तेजी से कार्य करने के लिए 4 फास्ट ट्रैक कोर्ट की स्थापना की है। उच्च न्यायालय जबपलपुर के विशेष सहयोग से 24 घंटे के अंदर ही इंदौर, भोपाल, ग्वालियर और जबलपुर में फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित की गई हैं।

    न्याय में देरी भी अन्याय ही है

    मुख्यमंत्री डॉ.मोहन  यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में साइबर सुरक्षा, राष्ट्रीय स्वचालित प्रणाली, ई-जीरो एफआईआर के माध्यम से पुलिस प्रणाली वर्तमान दौर की जरूरतों के अनुसार सुदृढ़ हो रही है। आज के आयोजन में जस्टिस टू चिल्ड्रन लिटिगेशन फेलोशिप प्रोग्राम का शुभारंभ और न्याय के स्वर पुस्तक का विमोचन अत्यंत सराहनीय कदम है। उन्होंने कहा कि मालवा की धरती सम्राट विक्रमादित्य और राजा हरिश्चंद्र के काल से वंदनीय रही है। जहां हर कालखंड में कदम-कदम पर न्याय के उत्कृष्ट उदाहरण समाने आए हैं। लगभग 250 वर्ष पूर्व इसी न्याय नगरी में लोकमाता अहिल्याबाई होलकर ने सुशासन की स्थापना की थी। कोई शासक न्याय करते समय पुत्र और प्रजा में भेदभाव न करे, यह उदाहरण होलकर सम्राज्य में ही देखने को मिला है।

    उन्होंने अपने इकलौते पुत्र को गलती के लिए उसी प्रकार दंडित किया, जैसा कोई न्यायाधीश करता है। इसी प्रकार लगभग 2 हजार वर्ष पूर्व सम्राट विक्रमादित्य का उदाहरण देखने को मिलता है। जब उन्होंने विदेशी आक्रांता शकों को पराजित कर उनकी बेटी से विवाह किया। जब उनके सैनिक पत्नी के भाइयों को बंदी बनाकर सामने लाते हैं तो दोष सिद्ध होने और पत्नी के द्वारा भाइयों के लिए प्राणदान की मांग करने पर भी न्याय के मार्ग से विचलित नहीं हुए। उन्होंने भारतीय न्याय व्यवस्था का सम्मान करते हुए कहा कि हमारे लिए देरी से दिया गया न्याय भी अन्याय के समान है। उन्होंने अपने सालों को प्राणदंड देकर उत्कृष्ट परंपरा का निर्वहन किया।

    संवाद से ही संभव है हल

    कार्यक्रम में भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि न्याय व्यवस्था के संदर्भ में सशक्त भविष्य, गरिमा, समावेशन सिर्फ शब्द नहीं, बल्कि यह विधिक सहायता की वास्तविक परिभाषा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने देवी अहिल्याबाई होलकर के न्याय के प्रति समर्पण का जिक्र किया। लोकमाता के लिए न्याय सबके लिए समान था। वे इकलौती महिला शासक थीं, जो निर्बाध रूप से प्रतिदिन नागरिकों, किसानों और विधवाओं से मुलाकात कर उनकी समस्याओं का समाधान करती थीं। वे सीधे नागरिकों से संवाद करती थीं, उनके शासनकाल में किसी के साथ भेदभाव नहीं होता था। ऐसी इंदौर नगरी में इस सम्मेलन का आयोजन किया गया है। इसके लिए मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण बधाई का पात्र है।

    उन्होंने कहा कि संवाद की प्रक्रिया अनेक विचारों से एकमत या आवाज तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। सभी के पास न्याय की पहुंच सिर्फ कानून के आधार पर तैयार नहीं हो सकती है। यह संवाद से ही संभव है। उन्होंने कहा कि न्याय की प्रक्रिया केवल न्यायपालिका या किसी एक संस्था से पूरी नहीं होती है। इस यज्ञ में सबको मिलकर आहूति देनी होती है। किसी विवाद में मध्यस्थता की प्रक्रिया सामने वाले के सुनने से प्रारंभ होती है। न्याय मिलने से पहले पीड़ित को यह विश्वास होना आवश्यक है कि उसकी पीड़ा या समस्या को कोई सुन रहा है।

    सभी का समान वैधानिक उद्देश्य – CJI 

    जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) के संवाद और चर्चा के लिए कार्यक्रमों से राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जिला और तहसील स्तर की संस्थाएं जुड़ी हैं। हमारे पैरा लीगल वॉलेंटियर सामाजिक व्यवस्था के सबसे करीब होते हैं। उनकी भूमिकाएं अलग हो सकती हैं, लेकिन हम सभी एक समान संवैधानिक उद्देश्य से साथ जुड़े होते हैं। वेस्ट जोन में विधिक सेवाओं का विस्तार मध्यप्रदेश के जनजातीय समुदाय, गोवा के मछुआरा समुदाय, गुजरात के माइग्रेंट वर्कर और मुंबई में रहने वाली किसी महिला के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। सभी की अलग-अलग समस्याएं हो सकती हैं। हर समस्या का समाधान एक जैसा नहीं होगा, बल्कि उसकी प्रकृति के अनुसार हमें अलग समाधान प्रदान करना होगा। स्थानीय समस्या को उसी सोच के साथ निदान तक लेकर जाना पड़ेगा। उस समस्या को समझने के लिए उनकी भाषा को समझना होगा। पीड़ित के दु:ख को उसी के शब्दों में सुनाना पड़ेगा। इससे समस्या को समझने और उसका निदान करने में बड़ा अंतर देखने को मिलेगा।

    उन्होंने कहा कि जिस प्रकार डॉक्टर मरीज से बात करके उसकी परेशानियों को समझता है। उसी प्रकार किसी समुदायों की समस्या को जानने के लिए हमें संवाद का सहारा लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह क्रॉन्फ्रेंस केवल अपने विचारों का आदान-प्रदान करने का मंच नहीं है, बल्कि सभी को न्याय की पहुंच समान बनाने के लिए एक बेहतर व्यवस्था का निर्माण करना है। सशक्त भविष्य के लिए हम आज संवाद, नागरिकों की गरिमा, समानता की आवश्यकता है। पीड़ित को सबसे पहले मानवीय व्यवहार के साथ रिसीव करें। उसकी समस्या सुनें और फिर निदान के लिए प्रयास किया जाए। किसी को समान-सम्मान देने में डिगनिटी शामिल है। गरीब, आर्थिक रूप से पिछड़े, महिलाओं की सहायता करना कोई चैरिटी नहीं है। हम केवल उसके सहायक हैं।

    न्याय में दिखे समानता का भाव

    जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि समाज के अंतिम छोर के व्यक्ति तक न्याय की पहुंच हो, इसी में समानता का भाव छिपा है। समानता स्वयं से पूछता है कि हममें से कोई पीछे तो नहीं रह गया। हमें प्रगति और अधिकारों के दिलवाने की लड़ाई में देखना होगा कि कहीं कोई पीछे तो नहीं छूट गया। समानता और न्याय की पहुंच हर नागरिक का अधिकार है और यह सुनिश्चित करना भी हम सभी की जिम्मेदारी है। हमारी क्षमता इसमें नहीं कि जो हमारे पास आ गया उसकी सहायता करें, बल्कि असल परीक्षा तो यह है कि जो हमारे पास नहीं आया है, हम उसके पास कैसे पहुंचे। पैरा लीगल वालंटियर्स हमारी लीगल सेना और समाजसेवी की तरह हैं। यही काम महात्मा गांधी ने समाज के लिए किया था। समानता केवल स्कीम लॉन्च करने से नहीं आएगी। संवाद सुनिश्चित करता है कि हर समस्या को सुना जाए। गरिमा सुनिश्चित करती है कि सभी से सम्मानपूर्वक बर्ताव हो। समावेशन सुनिश्चित करता है कि कोई पीछे न छूटे।

    सुशासन का वास्तविक आधार है न्याय

    केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि भारतीय न्याय व्यवस्था में न्याय केवल न्यायालयों तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति तक इसकी पहुंच हो, यह हमारी प्रतिबद्धता है। दुनिया में भारत की पहचान लोकतंत्र की जननी के तौर पर है। लेकिन, हमारी सभ्यता ने रूल ऑफ लॉ, नेचुरल जस्टिस, मध्यस्थ संवाद और लोक कल्याण की परंपरा को आत्मसात किया है। भारतीय कानून में नैतिकता, समानता और मानव कल्याण का आधार रहा है। भारतीय संविधान निर्माताओं ने संविधान में सबसे पहले जस्टिस को स्थान दिया है। सोशल, इकोनोमिकल और पॉलिटिकल जस्टिस, ये तीनों शब्द भारतीय संवैधानिक दर्शन की आधारशिला है। आर्टिकल 39A के माध्यम से संविधान ने सभी राज्यों को यह दायित्व सौंपा है कि प्रत्येक नागरिक को नि:शुल्क न्याय की व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए। आर्थिक और सामाजिक स्थिति किसी भी व्यक्ति को न्याय से वंचित नहीं कर सकती है। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण ने न्याय को प्रत्येक व्यक्ति तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका उपलब्ध कराई है। न्याय समान अवसर है, न्याय विश्वास है। आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस (एआई) ने न्याय प्रक्रिया को बहुभाषीय बनाने में महत्वपूर्ण कार्य किया है। मध्यप्रदेश को हार्ट ऑफ इंडिया है, जहां सांस्कृतिक विरासत, जनजातीय परंपराओं और सामाजिक विविधताओं का संगम देखने को मिलता है। राजा भोज की सुशासन परंपरा और देवी अहिल्याबाई होलकर की न्यायिक शासन व्यवस्था हमें प्रेरणा देती है कि सुशासन का वास्तविक आधार न्याय ही है।

    समस्या का सरलता से निकलेगा हल

    सुप्रीम कोर्ट के न्यायधीश विक्रम नाथ ने कहा कि राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकारण (नालसा) की शिक्षा स्कीम और साइन लैंग्वेज में थीम सॉन्ग न्याय की पहुंच को जन-जन तक पहुंचाने में सहायक सिद्ध होगा। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण की योजनाओं के हिंदी संस्करण और ब्रेल लिपि में गाइड का विमोचन दृष्टि बाधितों के लिए न्याय की आस बनकर सामने आएगा। स्पर्श के माध्यम से दिव्यांगजन किसी अन्य की सहायता लिए बगैर यह सुनिश्चित कर पाएंगे कि विधिक सेवाएं उनके लिए उपलब्ध हैं। नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी जबलपुर के सहयोग से मध्यस्थता पर सर्टिफिकेट कोर्स- विवाद से सहमति का शुभारंभ भी नालसा के प्रयासों को आगे बढ़ाने में सहायक होगा। इससे परिवार, पड़ोसी और साझेदारी जैसे मुद्दों का संवाद के जरिए समाधान निकलेगा। मध्यस्थता एक ऐसा माध्यम बनेगा, जिसमें नागरिकों के पास सहमति से हल निकालने की शक्ति होगी, न कि कोई समाधान उन पर थोपा जाए। न्याय सभी के लिए समान रूप से उपलब्ध है।

    सभी को मिले न्याय पाने की सुगम पहुंच

    सुप्रीम कोर्ट के न्यायधीश मनमोहन ने कहा कि न्याय केवल विधायी कानून के पुलिंदों और न्यायालयों के परिभाषित करने से संभव नहीं होता है। यह एक विश्वास है कि जब भी कोई मुश्किल में है तो वह फोरम तक पहुंचे और समाधान प्रक्रिया की सहायता प्राप्त कर सके, जहां उसे न्याय मिलेगा। आज न्याय प्रक्रिया को अधिक प्रभावशाली बनाने के लिए संवाद, सम्मान और समानता पर जोर देनी की आवश्यकता है। यह हम सभी के एक लक्ष्य के साथ चलने और एक दिशा में कार्य करने से  संभव हो सकता है। न्याय को केवल विवादों को हल करने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि फ्यूचर इंफ्रास्ट्रक्चर के तौर पर देखा जाना चाहिए। मध्यस्थ प्रक्रिया हमारी न्याय व्यवस्था के लिए मामलों का निपटारा करने का सबसे कारगर तरीका हो सकता है। आउट ऑफ द बॉक्स थिंकिंग से ही हम न्याय चाहने वाले नागरिकों को संतुष्ट कर सकते हैं। न्याय की समानता समाज के हर वर्ग के साथ जनजातीय समुदायों के लिए भी सुनिश्चित हो। सभी को न्याय पाने के लिए सुगम पहुंच मिलनी चाहिए।

    हमारे संकल्प को मिलेगी नई दिशा

    मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के कार्यकारी मुख्य न्यायधीश विवेक रुसिया ने कहा कि यह सम्मेलन हमारे संकल्प को नई दिशा प्रदान करेगा। हम सभी के एकीकृत प्रयासों से ही न्याय सभी के लिए समान रूप से आशा और उम्मीद की किरण बनेगा। एक्सेस ऑफ जस्टिस एक संवैधानिक सोच नहीं, बल्कि हमारी नैतिक जिम्मेदारी है। समानता को चैरिटी के रूप में नहीं देखा जाए, यह एक संवैधानिक अधिकार है। तकनीकी नवाचारों ने सभी वर्गों तक विधिक सेवाओं की पहुंच को सभी के लिए आसान और सुगम बनाया है।

    हमें इस आयोजन में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का भी विशेष सहयोग मिला है। मध्यप्रदेश न्यायिक विधिक सेवा प्राधिकरण का प्रयास रहा है कि न्याय केवल न्यायालयों तक सीमित न रहे, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति तक इसकी सरल, सहज और सम्मानजनक पहुंच हो। लोक अदालतें, कारागार सुधार और विधिक सेवाओं का जनजातीय क्षत्रों तक विस्तार की पहल सराहनीय है। हमारे प्रशिक्षित मध्यस्थों का एक तंत्र अनेक मामलों का निपटारा न्यायालयों से पूर्व संवाद और सहमति से कर रहा है। दिव्यांगों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है।

    • Get News Portal Website @Rs.5999 | WhatsApp on +91 8871571321
    • Get Web Hosting @Rs49 | Visit - HostRT.in
    Share. Facebook Twitter LinkedIn Email Telegram WhatsApp
    Khabarwaad News Desk
    • Website

    Keep Reading

    ड्रग्स के खिलाफ आर-पार की लड़ाई, CM डॉ. मोहन यादव बोले- पूरे नेटवर्क को करेंगे ध्वस्त

    मध्यप्रदेश में ‘मुख्यमंत्री जनविश्वास अभियान’ की शुरुआत

    स्कूल की ‘स्टूडेंट कैबिनेट’ से रूबरू हुए सीएम डॉ. मोहन यादव, छात्राओं के सवालों का दिया खुलकर जवाब

    9 अगस्त को भोपाल में निकलेगी भव्य तिरंगा यात्रा, खेल सुविधाओं के विस्तार पर सीएम डॉ. मोहन यादव का जोर

    सीएम डॉ. मोहन यादव का फैसला: भवन अधिभोग उल्लंघन मामलों की जांच करेगी समिति, तब तक कार्रवाई पर रोक

    दिल्ली में होगी मध्यप्रदेश कांग्रेस की बड़ी समीक्षा बैठक, संगठन में बड़े बदलाव के संकेत

    Add A Comment

    Comments are closed.

    Khabarwaad Vacancy

    Pages

    • Home
    • About Us
    • Privacy Policy
    • Contact Us

    Categories

    • छत्तीसगढ़
    • मध्यप्रदेश
    • राष्ट्रीय समाचार
    • अपराध
    •  
    • खेल
    • राजनीति
    • धर्म एवं समाज
    • मनोरंजन

    Owner / Editor Details :- 

    Name :- Shrikant Baghmare

    Contact :- 6264 390 985

    Email :- khabarwaadnews@gmail.com

     

    © 2026 Maintained By RTISPL
    • Home
    • About Us
    • Privacy Policy
    • Terms of service
    • Contact Us

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.