बिलासपुर। हाईकोर्ट ने शहर में जगह जगह कचरे के ढेर, अतिक्रमण और बिना प्लानिंग निर्माण पर जिला प्रशासन और निगम अफसरों को जमकर फटकार लगाई है…. चीफ जस्टिस की डिवीजन बेंच ने कहा कि एक पेन से जो काम हो सकता है वह आप नहीं करते….सिर्फ ड्रामा करने जाते हैं। शहर में जगह- जगह हुए अतिक्रमणों को हटायें इसके लिए आपके पास पर्याप्त आदेश हैं।
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निगम और प्रशासन की लापरवाही से आम लोगों का जीवन नर्क बन रहा है।शहर में जगह जगह गंदगी और कचरे के ढेर पर स्व संज्ञान लेकर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि,लोगों की परेशानियों पर नजर रखकर उसका निवारण करना हमारा काम नहीं है, मगर जो हो रहा है उसे इग्नोर भी नहीं किया जा सकता। जस्टिस सिन्हा ने कहा कि, स्मार्ट सिटी लिमिटेड ने जो फुटपाथ बनाया है , उस पर कोई दिव्यांग तो क्या, अच्छा खासा आदमी नहीं चल सकता। जगह जगह अतिक्रमण है। इस दिव्यांग अनुकूल फुटपाथ पर डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट और निगम कमिश्नर खुद जाकर देखें।
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निगम आयुक्त को इस तरह की लापरवाही के लिए सस्पेंड किया जाना चाहिए।वहीं महामाया मंदिर परिसर के कुंड में मछली पकड़ने लगाए गए जाल में दो दर्जन कछुए मारे जाने पर चीफ जस्टिस ने कहा कि वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन एक्ट का क्या हाल किया जा रहा है। इस समय मंदिर ट्रस्ट क्या कर रहा था? इस जगह रोजाना लोगों का आना जाना होता है। जाल किस तरह लगाया गया कि, इतने सारे कछुए चपेट में आ गये। जिला प्रशासन की भी जवाबदारी है। डीएम अपने ऑफिस में बैठें और न्यूज़ पेपर देखें तो सब मालूम हो जायेगा।
समस्याओं का निराकरण कैसे करेंगे, निगम व प्रशासन को शपथपत्र में बताने के निर्देश जरहाभाटा ओमनगर में लगातार कचरा जमा होने का भी जिक्र किया जिसमें 4 करोड़ साफ़ सफाई में यूँ ही व्यय किये जाने की बात कही गई है। सिरगिट्टी में कारखानों के अवशेष और कचरा डंप करने पर भी सवाल उठाते हुए सभी मुद्दों पर डिवीजन बेंच ने कलेक्टर बिलासपुर और नगर निगम आयुक्त बिलासपुर से व्यक्तिगत शपथपत्र पर जवाब माँगा है। इसमें बताना होगा कि प्रशासन इन सारी समस्याओं का निराकरण कैसे करेगा। अगली सुनवाई 9 अप्रैल को निर्धारित की गई है।




