बीजापुर। कभी नक्सलियों का सबसे बड़ा गढ़ और सुरक्षित ठिकाना रही कर्रेगुट्टा पहाड़ी अब सुरक्षाबलों की ताकत बढ़ाने का केंद्र बनने जा रही है। इस पहाड़ी पर जल्द ही देश का दूसरा जंगल वारफेयर कॉलेज स्थापित किया जाएगा। यहां सीआरपीएफ, छत्तीसगढ़ पुलिस, DRG और अन्य सुरक्षा बलों के जवानों को जंगल में लड़ाई और आतंकवाद-नक्सलवाद से निपटने की उन्नत ट्रेनिंग दी जाएगी।
कॉलेज का निर्माण कार्य केंद्र सरकार करेगी, जबकि यहां तक पहुंचने के लिए सड़क और अन्य आधारभूत सुविधाएं राज्य सरकार उपलब्ध कराएगी। यह प्रदेश का दूसरा और देश के चुनिंदा कॉलेजों में से एक होगा।
21 दिन चला था कर्रेगुट्टा ऑपरेशन
कर्रेगुट्टा पहाड़ी को इसी वर्ष एक ऐतिहासिक ऑपरेशन के बाद नक्सलियों से मुक्त कराया गया। 21 अप्रैल से शुरू इस अभियान में लगातार 21 दिन तक मुठभेड़ और सर्चिंग ऑपरेशन चला। इस दौरान 31 नक्सली ढेर किए गए, सुरक्षाबलों ने नक्सलियों के बनाए 214 बंकर ध्वस्त किए और 4 तकनीकी इकाइयों को नष्ट किया।
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नक्सलियों की राजधानी कही जाती थी कर्रेगुट्टा
करीब 900 मीटर ऊंची इस पहाड़ी में कई गुफाएं हैं। घने जंगल और ऊंचाई के कारण यह वर्षों तक नक्सलियों का सुरक्षित ठिकाना बना रहा। यही नहीं, यहां नक्सलियों ने कैंप और हथियार बनाने की इकाइयां भी चला रखी थीं। कर्रेगुट्टा छत्तीसगढ़ और तेलंगाना की सीमा से जुड़ा इलाका है, इसलिए यह रणनीतिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
2004 में कांकेर में खुला था पहला कॉलेज
नक्सली गतिविधियों से निपटने के लिए वर्ष 2004 में कांकेर जिले के जगदलपुर रोड पर काउंटर टेररिज्म एंड जंगल वारफेयर कॉलेज की स्थापना की गई थी। यह संस्थान देशभर में अपनी विशेष ट्रेनिंग पद्धति के लिए जाना जाता है। अब कर्रेगुट्टा में दूसरा कॉलेज खुलने से नक्सल उन्मूलन के प्रयासों को और मजबूती मिलेगी।
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स्थायी समाधान की ओर बड़ा कदम
डिप्टी सीएम एवं गृहमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि, कर्रेगुट्टा पहाड़ी नक्सलियों का सबसे सुरक्षित गढ़ रही है, लेकिन अब इसे स्थायी रूप से नक्सलमुक्त कर दिया गया है। यहां जंगल वारफेयर कॉलेज की स्थापना स्थायी समाधान और नक्सल उन्मूलन की दिशा में ऐतिहासिक कदम साबित होगा।




