नई दिल्ली। दिल्ली में आयोजित होने वाली भव्य लवकुश रामलीला में इस बार पूनम पांडे मंदोदरी का किरदार नहीं निभाएंगी। रामलीला कमेटी ने आज इस संबंध में अंतिम निर्णय लेते हुए पूनम पांडे को पत्र लिखकर सूचित किया।
समिति के अध्यक्ष अर्जुन कुमार और महासचिव सुभाष गोयल ने बताया कि पूनम पांडे ने पहले समिति के आमंत्रण पर मंदोदरी की भूमिका निभाने के लिए सहमति दी थी। लेकिन उनके नाम की घोषणा के तुरंत बाद विभिन्न संस्थानों और समुदायों से आपत्तियां सामने आईं। इन विरोधों के कारण रामलीला के मूल उद्देश्य भक्तिपरक रूप से प्रभु श्रीराम का संदेश समाज तक पहुंचाना में बाधा उत्पन्न हो रही थी।
Read Also- सपा नेता आजम खान 23 महीने बाद जेल से रिहा: कार्यकर्ताओं की 73 गाड़ियों का कटा चालान
इस पर गहन विचार-विमर्श के बाद समिति ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि इस वर्ष मंदोदरी का किरदार किसी अन्य कलाकार से निभवाया जाएगा। समिति ने पत्र में लिखा, “हमें क्षमा कर दें। हम आपके उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हैं और आशा करते हैं कि आप हमारे निर्णय को समझेंगी।
पूरे नौ दिन का व्रत रखने और इस किरदार को निभाने के अपने उत्साह को लेकर कल ही पूनम पांडे ने एक वीडियो साझा किया था। हालांकि, उनके नाम की घोषणा के बाद विरोध लगातार बढ़ता गया।
Read Also- महाराष्ट्र: उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के बीच निकाय चुनाव के लिए गठबंधन फाइनल, सीट बंटवारे पर चर्चा
विश्व हिंदू परिषद और कंप्यूटर बाबा सहित कई धार्मिक संगठनों ने उनके रामलीला में चयन का विरोध किया। कंप्यूटर बाबा ने टिप्पणी की थी कि पूनम पांडे को मंदोदरी का नहीं, बल्कि सूर्पनखा का रोल दिया जाना चाहिए। वहीं, विश्व हिंदू परिषद ने समिति को पत्र लिखकर आग्रह किया कि रामलीला केवल नाट्य प्रस्तुति नहीं, बल्कि भारतीय समाज और संस्कारों का जीवंत हिस्सा है, इसलिए उन्हें इस भूमिका से हटाया जाना चाहिए।




