नई दिल्ली। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, 2023 में अनुसूचित जनजातियों (STs) के खिलाफ अपराधों में 28.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई। पिछले वर्ष 2022 में 10,064 मामले दर्ज हुए थे, जबकि 2023 में यह संख्या बढ़कर 12,960 हो गई।
अनुसूचित जातियों (SCs) के खिलाफ अपराध भी बढ़ा है। 2022 में कुल 57,582 मामले दर्ज किए गए, जो 2021 के 50,900 मामलों की तुलना में 13.1 प्रतिशत अधिक हैं। अपराध दर 2021 के 25.3 से बढ़कर 2022 में 28.6 हो गई।
मणिपुर में अनुसूचित जनजातियों के खिलाफ मामलों में अचानक उछाल
मणिपुर में 2023 में अनुसूचित जनजातियों के खिलाफ 3,399 मामले दर्ज किए गए, जबकि 2022 में केवल एक और 2021 में कोई मामला नहीं था। यह वृद्धि मई 2023 से मणिपुर के मैतेई और कुकी-जो समुदायों के बीच जारी जातीय हिंसा से जुड़ी है।
मध्य प्रदेश 2,858 मामलों के साथ दूसरे स्थान पर रहा, जबकि राजस्थान में 2,453 मामले दर्ज किए गए। राजस्थान पुलिस के अनुसार, 2017 से 2023 तक दलित और आदिवासियों के खिलाफ कुल 56,879 मामले दर्ज हुए। 2022 में दोषसिद्धि दर 22.38 प्रतिशत रही।
महिलाओं के खिलाफ अपराध में मामूली बढ़ोतरी
2023 में महिलाओं के खिलाफ अपराधों की संख्या 4,48,211 दर्ज की गई, जो 2022 की तुलना में 0.7 प्रतिशत अधिक है। NCRB के अनुसार, सबसे अधिक मामले पति या रिश्तेदार द्वारा क्रूरता (1,33,676), अपहरण (88,605), यौन उत्पीड़न (83,891) और पॉक्सो एक्ट के तहत बच्चों के खिलाफ अपराध (66,232) दर्ज किए गए। 2023 में प्रति लाख महिला आबादी पर अपराध दर 66.2 रही।
रिपोर्ट से यह स्पष्ट होता है कि अनुसूचित जातियों, जनजातियों और महिलाओं के खिलाफ अपराधों में लगातार वृद्धि हो रही है, जो समाज के संवेदनशील वर्गों की सुरक्षा के लिए चिंता का विषय है।




