बिलासपुर। छत्तीसगढ़ की जर्जर सड़कों को लेकर दायर जनहित याचिकाओं पर हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान लोक निर्माण विभाग (PWD) के सचिव ने अदालत को बताया कि एनआईटी रायपुर की रिपोर्ट में देरी के कारण सड़क मरम्मत का कार्य शुरू नहीं हो पा रहा है। इस पर चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस बी.डी. गुरु की डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार को रिपोर्ट पेश करने के लिए दो सप्ताह का अतिरिक्त समय दिया है।
बिलासपुर में पेंड्रीडीह–नेहरू चौक रोड की स्थिति बदतर
|बिलासपुर शहर में पेंड्रीडीह से नेहरू चौक तक बनी कंक्रीट सड़क पर जगह-जगह बड़ी दरारें उभर आई हैं। यह सड़क पहले एनएचएआई द्वारा बनाई गई थी, लेकिन शहर के अंदरूनी हिस्से में होने के कारण लगभग 15 किलोमीटर की इस सड़क को बाद में पीडब्ल्यूडी को हैंडओवर कर दिया गया।
पीडब्ल्यूडी कई बार मरम्मत कर चुकी है, लेकिन कुछ ही दिनों में सड़क फिर से उसी हालत में लौट आती है। विशेषज्ञों का कहना है कि कंक्रीट सड़क में दरारें आने पर पूरा पैनल बदलना आवश्यक होता है, जबकि वर्षों से केवल दरारों को भरकर अस्थायी समाधान किया जा रहा है।
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एनआईटी रायपुर से मांगी रिपोर्ट, PWD ने भेजे रिमाइंडर
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने बताया कि सड़क की तकनीकी स्थिति पर एनआईटी रायपुर से रिपोर्ट मांगी गई है, लेकिन अभी तक रिपोर्ट नहीं मिल पाई है।
लोक निर्माण विभाग, डिवीजन-1 बिलासपुर के कार्यपालन अभियंता ने 28 अक्टूबर और 11 नवंबर को एनआईटी को रिमाइंडर भेजे हैं। इसकी प्रतियां भी कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत की गईं।
रतनपुर में शुरू हुई मरम्मत
अदालत को यह भी बताया गया कि रतनपुर स्थित महामाया मंदिर के पास 7 नवंबर से सड़क मरम्मत कार्य शुरू कर दिया गया है। संबंधित दस्तावेज़ और तस्वीरें भी कोर्ट में दाखिल की गईं। साथ ही हाईकोर्ट के 10 नवंबर के आदेश के पालन में एक हजार रुपए रजिस्ट्री में जमा किए जाने की जानकारी दी गई।
हाईकोर्ट ने मांगी सभी खराब सड़कों की सूची
राज्य सरकार ने एनआईटी की रिपोर्ट और आगे की कार्रवाई के लिए दो हफ्ते का अतिरिक्त समय मांगा है। वहीं न्यायमित्र ने बताया कि वे जल्द ही राज्य की अन्य जर्जर सड़कों की विस्तृत रिपोर्ट कोर्ट में सौंपेंगे, जिन पर तत्काल सुधार की आवश्यकता है।




