रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजनीति का स्वाद अब और भी दिलचस्प होने वाला है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अपनी कैबिनेट में जिन तीन नए मंत्रियों की एंट्री कराई है, उसमें दो पुराने कांग्रेसिया और एक खालिस संघी मिलकर राजनीतिक ‘थाली’ को और स्वादिष्ट बना रहे हैं।
पहला नाम है खुशवंत साहेब का — जिनके पिता बाल दास साहेब ने पूरी जिंदगी राजनीति के स्वर्गलोक का सपना देखा और बेटा टिकट की खोज में कभी कांग्रेस तो कभी भाजपा की सीढ़ियां चढ़ते-उतरते रहे। इसे आप राजनीतिक तीर्थयात्रा कह सकते हैं। अब जाकर साहेब को मंत्री पद का प्रसाद मिलने वाला है। सोशल मीडिया पर इसे देखकर कांग्रेस चुटकी ले रही है कि भाजपा सरकार का “कांग्रेसीकरण” हो गया है।
दूसरे खिलाड़ी हैं अंबिकापुर वाले राजेश अग्रवाल। कभी कांग्रेस के झंडाबरदार थे, नगर पालिका अध्यक्ष भी रहे। लेकिन जब समझ आया कि टीएस सिंहदेव के सामने टिकट मिलना उतना ही मुश्किल है जितना दिल्ली में मेट्रो में सीट मिलना, तो फटाफट भाजपा की ट्रेन पकड़ ली। 2023 में सिंहदेव को हराया और अब मंत्री बनने की लाइन में खड़े हैं।
अब आते हैं तीसरे चेहरे पर, जो है गजेंद्र यादव। ये साहब बचपन से ही संघ की शाखा में झूला झूलते आए हैं। उनके पिता प्रांत संघचालक रहे और ये खुद पार्षद, स्काउट गाइड के सचिव और मंत्री केदार कश्यप के ‘राजनीतिक स्टूडेंट’ भी। सुगबुगाहट है कि इन्हें शिक्षा विभाग मिलेगा, क्योंकि इनके अनुभव का ‘पाठ्यक्रम’ वहीं फिट बैठता है।
साय कैबिनेट में नए मंत्री तीनों की कहानी साफ कहती है; राजनीति में पार्टी बदलना पाप नहीं, बस जीतना जरूरी है। कांग्रेस से आए लोग भाजपा में फूल-फल रहे हैं, और संघ से आए गजेंद्र यादव तो कह ही रहे होंगे: “सच्चा स्वयंसेवक वही, जो मंत्री बन जाए।”




