दिल्ली। दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्रसंघ (डूसू) चुनाव में महंगी और लग्जरी कारों के इस्तेमाल को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है। चीफ जस्टिस देवेन्द्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तुषार राव गेडेला की बेंच ने सुनवाई के दौरान सवाल उठाया कि छात्रों को इतनी महंगी कारें कहां से मिलीं, जिनके बारे में “हमने सुना तक नहीं है।” कोर्ट ने यूनिवर्सिटी प्रबंधन और नवनिर्वाचित छात्र नेताओं से इस मामले में स्पष्टीकरण मांगा है।
कोर्ट की टिप्पणी: प्रचार अनुचित
हाईकोर्ट ने कहा कि डूसू चुनाव में उम्मीदवारों ने पिछले साल के न्यायिक आदेशों से कोई सबक नहीं लिया, जिसमें उपद्रव और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान के कारण चुनाव परिणाम रोके गए थे। कोर्ट ने नवनिर्वाचित अध्यक्ष आर्यन मान (एबीवीपी), उपाध्यक्ष राहुल झांसला (एनएसयूआई), सचिव कुणाल चौधरी (एबीवीपी) और संयुक्त सचिव दीपिका झा (एबीवीपी) को नोटिस जारी कर चुनाव प्रचार में जेसीबी और लग्जरी कारों के इस्तेमाल पर जवाब मांगा है। बेंच ने इस स्थिति को “बहुत दुखद” करार दिया।
लिंगदोह समिति की सिफारिशों का उल्लंघन
याचिकाकर्ता वकील प्रशांत मनचंदा ने कोर्ट को तस्वीरें और समाचार रिपोर्ट साझा कीं, जिनमें दावा किया गया कि लिंगदोह समिति की सिफारिशों और न्यायिक आदेशों के बावजूद नियमों का उल्लंघन हुआ। कोर्ट ने कहा कि छात्रसंघ चुनाव में इस तरह का भव्य प्रचार “अनुचित” है और इस पर रोक लगनी चाहिए।
यूनिवर्सिटी और पुलिस की भूमिका
हाईकोर्ट ने यूनिवर्सिटी और पुलिस के सहयोग की सराहना की, लेकिन साथ ही इस बात पर चिंता जताई कि डूसू और संबद्ध कॉलेजों के चुनावों में लग्जरी प्रचार पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। कोर्ट ने नवनिर्वाचित पदाधिकारियों से महंगी कारों और जेसीबी के उपयोग के स्रोत के बारे में स्पष्टीकरण मांगा है, ताकि इस मामले की गहराई से जांच हो सके।




