देहरादून। उत्तर भारत में मॉनसून की विदाई के बावजूद भारी बारिश ने तबाही मचाई। उत्तराखंड के देहरादून में सहस्त्रधारा पर्यटन स्थल पर बादल फटने से बाढ़ ने भयंकर नुकसान पहुंचाया, वहीं हिमाचल प्रदेश के धरमपुर, मंडी और शिमला में सड़कें बंद हो गईं और बस स्टैंड डूब गए।
सहस्त्रधारा में बादल फटने से तबाही
देहरादून का सहस्त्रधारा, जो गर्म पानी के झरनों के लिए प्रसिद्ध है, मंगलवार रात बादल फटने से बाढ़ की चपेट में आ गया। तमसा नदी और करलीगाड़ नाले का जलस्तर अचानक बढ़ने से कई दुकानें और घर बह गए। देहरादून-हरिद्वार नेशनल हाईवे पर फन वैली और उत्तराखंड डेंटल कॉलेज के पास एक पुल क्षतिग्रस्त हो गया। तपकेश्वर महादेव मंदिर परिसर में 1-2 फीट मलबा जमा हो गया, जिससे भारी नुकसान हुआ। आईटी पार्क के पास सड़कों पर वाहन बहते नजर आए। दो लोग लापता बताए जा रहे हैं, जिनकी तलाश जारी है।
हिमाचल में बिगड़े हालात
हिमाचल प्रदेश के धरमपुर, मंडी और शिमला में भारी बारिश ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया। बस स्टैंड पानी में डूब गए, वाहन बह गए और कई सड़कें बंद हो गईं। प्रशासन ने प्रभावित इलाकों में राहत कार्य शुरू किए हैं।
बचाव और प्रशासनिक कार्रवाई
देहरादून में जिला प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई शुरू की। जिला मजिस्ट्रेट सविन बंसल और एसडीएम कुमकुम जोशी ने घटनास्थल पर पहुंचकर बचाव कार्यों की निगरानी की। राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF), राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) और लोक निर्माण विभाग ने जेसीबी मशीनों से मलबा हटाने का काम शुरू किया। स्थानीय लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। भारी बारिश को देखते हुए देहरादून में कक्षा 1 से 12 तक के सभी स्कूलों की छुट्टी घोषित कर दी गई। प्रशासन हाई अलर्ट पर है।
तबाही के कारण
सहस्त्रधारा की नाजुक भू-संरचना और अनियोजित निर्माण ने इस आपदा को और गंभीर बना दिया। रात भर हुई मूसलाधार बारिश ने नदियों और नालों का जलस्तर खतरनाक स्तर तक बढ़ा दिया। विशेषज्ञों का कहना है कि भूस्खलन के जोखिम वाले क्षेत्रों में सख्त निर्माण नियमों की जरूरत है।
आगे की चुनौतियां
मॉनसून की विदाई के बावजूद मौसम की अनिश्चितता ने उत्तर भारत में खतरे की घंटी बजा दी है। प्रशासन लापता लोगों की तलाश और प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्यों में जुटा है। सहस्त्रधारा में हुए नुकसान ने पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर गहरा असर डाला है।




