बिलासपुर। हाईकोर्ट ने कहा है कि नीट उम्मीदवार की OMR शीट से छेड़छाड़ के आरोप गंभीर हैं और ठोस सबूत के बिना, सिर्फ शक, अंदाजे या अपनी सोच के आधार पर इन्हें स्वीकार नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर यह साबित करने के लिए कोई सबूत नहीं है कि तय तरीका उपलब्ध नहीं था या बेकार था, तो कोई उम्मीदवार परीक्षा लेने वाली संस्था की शिकायत निवारण प्रक्रिया को नजरअंदाज करके सीधे अनुच्छेद 226 के तहत हाईकोर्ट के रिट अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल नहीं कर सकता।
चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच नीट यूजी-2026 के एक उम्मीदवार की रिट याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें उसने अपनी मूल OMR शीट दिखाने और अपनी उत्तर पुस्तिका का दोबारा मूल्यांकन कराने की मांग की थी।




