Khabarwaad National Desk: आज चांद के दीदार होने के बाद अब देशभर में कल यानी 11 अप्रैल को ईद मनाई जाएगी. कल शाम इसकी घोषणा लखनऊ के मरकरी चांद कमेटी ईदगाह इमाम मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली ने भी की थी. दरअसल, चांद दिखने के आधार पर ही दुनियाभर में अलग-अलग दिनों में ईद-उल-फितर का त्योहार मनाया जाता है.
माना जाता है कि रमजान के दौरान साफ मन से रोजा रखने वाले और नमाज अदा करने वाले लोगों पर अल्लाह की रहमत बरसती है. वहीं ईद उल फितर के साथ ही रोजे का भी समापन हो जाता है. इस दिन लोग सुबह नए कपड़े पहनकर नमाज अदा करते हुए अमन और चैन की दुआ मांगते हैं. उसके बाद वो एक दूसरे से गले मिलकर ईद की मुबारकबाद देते हैं. यही नहीं, इसके बाद लोगों का एक दूसरे के यहां जाना और अलग-अलग तरीकों से ईद का जश्न मनाने की शुरुआत होती है.
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क्या है रिवाज?
ईद-उल-फितर में मीठे पकवान विशेषकर सेंवईंयां बनाने का रिवाज है. इस दिन लोग आपस में गले मिलकर एक दूसरे को ईद की मुबारकबाद देते हैं और प्रेम से एक-दूसरे को घर में बनी मिठाइयां व पकवान परोसते हैं. इस दिन लोग एक दूसरे को ईदी भी देते हैं. ईदी एक तरह से तोहफा होता है. इसमें कुछ गिफ्ट आइटम या पैसे या फिर कुछ और तोहफे दिए जाते हैं.
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ईद उल फितर क्या है?
ईद उल फितर को अरबी और एशियाई देशों में ईद अल फ़ितर के नाम से जाना जाता है. यह दुनिया भर के सभी मुसलमानों का सबसे प्रमुख और खास त्योहार है. ईद-उल-फितर रमजान ए पाक महीने के पूरे होने की खुशी में मनाई जाती है. यह त्योहार रोजे की समाप्ति का प्रतीक माना जाता है. ईद अल फितर उन सभी रोजेदारों के लिए अल्लाह की तरफ से इनाम है जिन्होंने रमजान के पाक महीने के दौरान रोजे रखे थे.
यह रोजेदारों द्वारा रमजान के महीने के दौरान अल्लाह की इबादत करने और उनके बताए रास्ते पर चलने और उनका शुक्रिया अदा करने के लिए भी मनाई जाती है. परंपरागत रूप से, ईद उल फितर लगभग सभी मुस्लिम देशों में तीन दिनों तक मनाई जाती है.




