Close Menu
KhabarwaadKhabarwaad
    Top Posts

    मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने ‘हर घर तिरंगा’ अभियान के तहत मुख्यमंत्री निवास में फहराया तिरंगा

    August 14, 2026

    छत्तीसगढ़ भू-संपदा अपीलीय अधिकरण के अध्यक्ष पद पर सेवानिवृत्त न्यायाधीश रजनी दुबे की नियुक्ति, आदेश जारी

    August 14, 2026

    विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के राज्य स्तरीय समारोह में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय हुए शामिल

    August 14, 2026
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Trending
    • मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने ‘हर घर तिरंगा’ अभियान के तहत मुख्यमंत्री निवास में फहराया तिरंगा
    • छत्तीसगढ़ भू-संपदा अपीलीय अधिकरण के अध्यक्ष पद पर सेवानिवृत्त न्यायाधीश रजनी दुबे की नियुक्ति, आदेश जारी
    • विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के राज्य स्तरीय समारोह में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय हुए शामिल
    • मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से निर्माता-निर्देशक डॉ. चंद्रप्रकाश द्विवेदी ने की मुलाकात, शॉल एवं प्रतीक चिन्ह भेंटकर किया अभिनंदन
    • दिलीप सिंह जूदेव की पुण्यतिथि पर CM साय ने किया नमन, राष्ट्र-समाज के योगदान को किया याद
    • विधायक पुरंदर मिश्रा का राहुल गांधी पर विवादित बयान, बोले- ‘सुबह ब्रश करेंगे तो बोली में आएगी शुद्धता’
    • स्टडी लीव लेकर पढ़ाई कर चुके कर्मचारियों को झटका, हाईकोर्ट ने दोबारा NOC की याचिका खारिज की
    • पद्मश्री अनूप रंजन पाण्डेय को मिला संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, छत्तीसगढ़ की लोककला को राष्ट्रीय सम्मान
    Facebook X (Twitter) Instagram
    KhabarwaadKhabarwaad
    Friday, August 14
    • Home
    • छत्तीसगढ़
      • रायपुर संभाग
      • दुर्ग संभाग
      • बिलासपुर संभाग
      • बस्तर संभाग
      • सरगुजा संभाग
    • मध्यप्रदेश
    • राष्ट्रीय समाचार
    • अपराध
    • राजनीति
    • धर्म एवं समाज
    • अफसरशाही
    • खेल
    • मनोरंजन
    • स्वास्थ्य
    • राशिफल
    • Auto & Gadget
    KhabarwaadKhabarwaad
    Home » पद्मश्री अनूप रंजन पाण्डेय को मिला संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, छत्तीसगढ़ की लोककला को राष्ट्रीय सम्मान

    पद्मश्री अनूप रंजन पाण्डेय को मिला संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, छत्तीसगढ़ की लोककला को राष्ट्रीय सम्मान

    Khabarwaad News DeskBy Khabarwaad News DeskAugust 14, 2026 छत्तीसगढ़ No Comments6 Mins Read

    रायपुर। छत्तीसगढ़ के जाने-माने संस्कृतिकर्मी और पद्मश्री से सम्मानित अनूप रंजन पांडेय को गुरुवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया. नई दिल्ली में आयोजित समारोह में राष्ट्रपति ने देशभर के विभिन्न राज्यों से आए कलाकारों को सम्मान प्रदान किया.

    सम्मान प्राप्त करने के बाद अनूप रंजन पांडेय ने इसे छत्तीसगढ़ के आदिवासी कलाकारों और प्रदेश की जनता को समर्पित किया. उन्होंने कहा कि यह सम्मान उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि भर नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की लोक एवं आदिवासी कला-संस्कृति से जुड़े हजारों कलाकारों की साधना का सम्मान है.

    समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि सम्मानित कलाकार मिलकर भारत का ऐसा सांस्कृतिक मानचित्र प्रस्तुत करते हैं, जिसमें देश की मिट्टी की कथाएं और गीत, विविध नृत्य और उत्सव तथा सदियों से विकसित भाषाओं और बोलियों की स्मृतियां समाहित हैं.

    राष्ट्रपति ने गुरु-शिष्य परंपरा को भारतीय कला परंपरा की महत्वपूर्ण आधारशिला बताते हुए कहा कि हमारी कलाओं की सबसे महत्वपूर्ण पुस्तक जीवंत गुरु होते हैं. उन्होंने लोक और जनजातीय कलाओं के संरक्षण की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि तेजी से बदलते समय में अनेक लोककलाएं विलुप्ति के संकट से गुजर रही हैं. इसलिए उनके दस्तावेजीकरण के साथ उन्हें जीवंत बनाए रखने के लिए विशेष प्रयास जरूरी हैं.

    चार दशक की सांस्कृतिक साधना, 3000 से अधिक नुक्कड़ नाटक

    21 जुलाई 1965 को बिलासपुर में जन्मे और जांजगीर-चांपा जिले के ग्राम कोसा निवासी अनूप रंजन पांडेय ने लोक संगीत, अभिनय और निर्देशन के क्षेत्र में चार दशक से अधिक समय तक काम किया है. संगीत, साहित्य और संस्कृति की प्रारंभिक शिक्षा उन्हें अपनी माता एवं गुरु भजन गायिका स्व. मनोरमा पाण्डेय तथा पिता एवं गुरु, शिक्षाविद और संस्कृत के विद्वान स्व. राधेश्याम पाण्डेय से मिली.

    गांव में होने वाले नाचा और कृष्ण की बाल लीलाओं पर आधारित रहस लोकनाट्य से प्रभावित पांडेय ने महज नौ वर्ष की उम्र में रेलवे स्कूल, बिलासपुर के मंच से अपनी पहली औपचारिक प्रस्तुति दी. बाद में बड़े भाई और अभिनेता रहे इंजीनियर आलोक रंजन पाण्डेय से अभिनय की बारीकियां सीखीं.

    1990 का दशक उनके सांस्कृतिक जीवन में महत्वपूर्ण रहा. राष्ट्रीय साक्षरता मिशन के तहत उन्होंने गांव-गांव जाकर नुक्कड़ नाटकों के माध्यम से जनजागरूकता अभियान चलाया. महिला सशक्तीकरण, पर्यावरण, जनस्वास्थ्य और साक्षरता जैसे विषयों पर 3000 से अधिक नुक्कड़ नाटकों का प्रदर्शन किया.

    इसी दौर में उन्हें पद्मभूषण हबीब तनवीर के निर्देशन में नया थिएटर के साथ काम करने का अवसर मिला. ‘चरणदास चोर’, ‘मिट्टी की गाड़ी’, ‘आगरा बाजार’, ‘मुद्राराक्षस’, ‘मोर नाव दमाद गाँव के नाव ससुरार’, ‘सड़क’, ‘राजरक्त’, ‘वेणीसंहार’ और ‘जिस लाहौर देख्या नई जन्मयाई नई’ सहित अनेक चर्चित नाटकों में उन्होंने अभिनय किया. इन प्रस्तुतियों के सिलसिले में उन्होंने देश के साथ इंग्लैंड, स्कॉटलैंड और जर्मनी की यात्राएं भी कीं.

    लोकसंपदा से बस्तर बैंड तक, ‘बंदूक छोड़ो… ढोल पकड़ो’ का संदेश

    लोक रंगमंच के साथ-साथ अनूप रंजन पांडेय ने छत्तीसगढ़ की मौखिक एवं वाचिक परंपराओं के संरक्षण का व्यापक काम किया. उन्होंने प्रदेश के 2500 लोकगीत, लोकगाथा और लोकवार्ताओं, 150 नाचा के नकल-प्रहसनों और 175 लोकवाद्यों का संकलन किया.

    छत्तीसगढ़ राज्य गठन के बाद उन्होंने 80 लोकवाद्य महंत घासीदास संग्रहालय, संस्कृति विभाग, छत्तीसगढ़ शासन को प्रदान किए. मध्यप्रदेश जनजातीय संग्रहालय, भोपाल के लिए उन्होंने देशभर से 200 सुषिर लोकवाद्यों का संग्रह किया. इनका प्रदर्शन भोपाल में गंधर्व लोकरंग आयोजन में किया गया और वर्तमान में ये वाद्य त्रिवेणी संग्रहालय, उज्जैन में प्रदर्शित हैं.

    इसी सांस्कृतिक यात्रा के दौरान बस्तर के पारंपरिक वाद्य ‘ढूसिर’ की संगत में ‘लिंगों पेन की गाथा’ सुनकर वे प्रभावित हुए. इसके बाद उन्होंने लगभग डेढ़ दशक पहले बस्तर के आदिवासी कलाकारों के साथ मिलकर ‘बस्तर बैंड’ की स्थापना की.

    बस्तर की पारंपरिक और दुर्लभ लोकवाद्य परंपरा को मंच पर लाने के साथ बस्तर बैंड ने हिंसा के खिलाफ ‘बंदूक छोड़ो… ढोल पकड़ो’ अभियान चलाया. इसका उद्देश्य युवाओं को रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ना और लोकवाद्य, लोकगीत-संगीत, लोकगाथाओं, मिथक कथाओं और आदिवासी कला-संस्कृति के संरक्षण के माध्यम से शांति का संदेश देना रहा.

    इस प्रयास के तहत बिखराव के संकट से जूझ रही 100 से अधिक कला मंडलियों को पुनर्गठित कर 5000 से अधिक कलाकारों को सक्रिय किया गया. बस्तर बैंड के 11 कलाकारों को अब तक राष्ट्रीय और राज्य स्तर के पुरस्कार मिल चुके हैं. बैंड ने रूस, नाइजीरिया, दक्षिण अफ्रीका और इटली सहित विभिन्न देशों में भी बस्तर की लोकसंस्कृति की प्रस्तुतियां दी हैं.

    पद्मश्री समेत कई प्रतिष्ठित सम्मान

    अनूप रंजन पाण्डेय को उनकी दीर्घकालीन सांस्कृतिक साधना के लिए कई प्रतिष्ठित सम्मान मिल चुके हैं. इनमें संस्कृति मंत्रालय की गुरु-शिष्य परंपरा योजना के तहत 2006 से 2008 तक लोकनाट्य ‘तारे-नारे’ के गुरु के रूप में प्रशिक्षण, वरिष्ठ अध्येतावृत्ति सम्मान-2016, टैगोर नेशनल स्कॉलरशिप 2019-20, छत्तीसगढ़ शासन का दाऊ मंदराजी लोक कला सम्मान-2014 और राष्ट्रीय स्वयं सिद्धश्री सम्मान-2017 प्रमुख हैं.

    भारत सरकार ने उन्हें 2019 में पद्मश्री, देश के चौथे सर्वोच्च नागरिक सम्मान से सम्मानित किया था. इसके अलावा उन्हें राष्ट्रीय तुलसी सम्मान, मध्यप्रदेश, लोक कला सम्मान, भिलाई इस्पात संयंत्र सहित विभिन्न सम्मानों से भी नवाजा जा चुका है.

    पांडेय ने साहित्य और प्रकाशन के क्षेत्र में भी काम किया है. उन्होंने सतत शिक्षा कार्यक्रम के लिए राज्य संसाधन केंद्र द्वारा निर्मित 114 नवपाठक साहित्य का संपादन किया. इनमें गोंड-परधान चित्रकारी पर आधारित ‘करम देव’ और ‘भगवान का धरती से ग़ायब हो जाना’ जैसी पुस्तकें शामिल हैं. वर्ष 2015 में उन्होंने इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ से लोक कला में पीएच.डी. की उपाधि प्राप्त की.

    राष्ट्रीय स्तर पर भी उन्होंने महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं. वे 15 वर्षों तक तीन कार्यकालों में संगीत नाटक अकादेमी, दिल्ली की जनरल कौंसिल के सदस्य रहे. इसके अलावा संस्कृति मंत्रालय की फैलोशिप योजना, जोनल कल्चरल सेंटर नागपुर, WIPO-IGC, भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद और राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय से जुड़ी विभिन्न समितियों में सदस्य के रूप में काम किया.

    वर्तमान में अनूप रंजन पाण्डेय ‘चिन्हारी रंगमंडल’ के निर्देशक और बस्तर बैंड, छत्तीसगढ़ के संचालक के रूप में सक्रिय हैं. उनकी पत्नी एवं लोककला मर्मज्ञ अस्मिता पाण्डेय और बेटी अनन्या पाण्डेय भी उनकी सांस्कृतिक यात्रा में सहयोगी के रूप में सक्रिय हैं.

    राष्ट्रपति से मिला यह सम्मान अनूप रंजन पाण्डेय की चार दशक से अधिक लंबी सांस्कृतिक यात्रा के साथ-साथ छत्तीसगढ़ की लोक एवं आदिवासी कला परंपरा के संरक्षण और उसे देश-दुनिया के मंच तक पहुंचाने के प्रयासों की राष्ट्रीय पहचान के रूप में देखा जा रहा है.

    • Get News Portal Website @Rs.5999 | WhatsApp on +91 8871571321
    • Get Web Hosting @Rs49 | Visit - HostRT.in
    Share. Facebook Twitter LinkedIn Email Telegram WhatsApp
    Khabarwaad News Desk
    • Website

    Keep Reading

    मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने ‘हर घर तिरंगा’ अभियान के तहत मुख्यमंत्री निवास में फहराया तिरंगा

    छत्तीसगढ़ भू-संपदा अपीलीय अधिकरण के अध्यक्ष पद पर सेवानिवृत्त न्यायाधीश रजनी दुबे की नियुक्ति, आदेश जारी

    विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के राज्य स्तरीय समारोह में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय हुए शामिल

    मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से निर्माता-निर्देशक डॉ. चंद्रप्रकाश द्विवेदी ने की मुलाकात, शॉल एवं प्रतीक चिन्ह भेंटकर किया अभिनंदन

    दिलीप सिंह जूदेव की पुण्यतिथि पर CM साय ने किया नमन, राष्ट्र-समाज के योगदान को किया याद

    विधायक पुरंदर मिश्रा का राहुल गांधी पर विवादित बयान, बोले- ‘सुबह ब्रश करेंगे तो बोली में आएगी शुद्धता’

    Add A Comment

    Comments are closed.

    Khabarwaad Vacancy

    Pages

    • Home
    • About Us
    • Privacy Policy
    • Contact Us

    Categories

    • छत्तीसगढ़
    • मध्यप्रदेश
    • राष्ट्रीय समाचार
    • अपराध
    •  
    • खेल
    • राजनीति
    • धर्म एवं समाज
    • मनोरंजन

    Owner / Editor Details :- 

    Name :- Shrikant Baghmare

    Contact :- 6264 390 985

    Email :- khabarwaadnews@gmail.com

     

    © 2026 Maintained By RTISPL
    • Home
    • About Us
    • Privacy Policy
    • Terms of service
    • Contact Us

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.