बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने शासकीय कर्मचारियों के उच्च शिक्षा के लिए अध्ययन अवकाश और अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) से जुड़े मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जो कर्मचारी पहले ही स्टडी लीव लेकर विभागीय कोटे से उच्च शिक्षा का लाभ उठा चुके हैं, वे दोबारा इसी आधार पर अवकाश या NOC पाने का कानूनी अधिकार नहीं जता सकते।
यह फैसला चिकित्सा शिक्षा विभाग में कार्यरत स्टाफ नर्स सोमलता साहू, मंजू शर्मा और रुखमणी धर दीवान की याचिकाओं पर सुनाया गया। तीनों की नियुक्ति वर्ष 2008 में स्टाफ नर्स के पद पर हुई थी। बाद में उन्होंने अध्ययन अवकाश लेकर पोस्ट बेसिक बीएससी नर्सिंग का कोर्स पूरा किया और डेमोस्ट्रेटर के पद पर पदोन्नति भी प्राप्त की।
MSc नर्सिंग के लिए मांगी थी NOC
तीनों कर्मचारियों ने हाल ही में एमएससी नर्सिंग की प्रवेश परीक्षा उत्तीर्ण की। इसके बाद उन्होंने चिकित्सा शिक्षा विभाग से बिना वेतन के असाधारण अवकाश और NOC देने का अनुरोध किया। विभाग ने उनके आवेदन को अस्वीकार कर दिया, जिसके बाद उन्होंने हाई कोर्ट का रुख किया।
याचिकाओं की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने छत्तीसगढ़ नर्सिंग पाठ्यक्रम प्रवेश नियम, 2019 के प्रावधानों का उल्लेख किया। कोर्ट ने कहा कि विभागीय कोटे के माध्यम से उच्च शिक्षा का लाभ पहले ही प्राप्त कर चुके कर्मचारी दोबारा उसी व्यवस्था के तहत प्रवेश के पात्र नहीं हैं।
NOC और असाधारण अवकाश अधिकार नहीं
हाई कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि उच्च शिक्षा के लिए बिना वेतन का असाधारण अवकाश या NOC प्राप्त करना कर्मचारी का वैधानिक अधिकार नहीं है। ऐसे मामलों में निर्णय विभाग की प्रशासनिक आवश्यकताओं और सेवा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए लिया जाता है।
कोर्ट ने इन आधारों पर तीनों स्टाफ नर्सों की याचिकाएं खारिज कर दीं। फैसले से शासकीय सेवा में कार्यरत उन कर्मचारियों के लिए स्थिति स्पष्ट हो गई है, जो विभागीय कोटे के माध्यम से पहले ही उच्च शिक्षा का लाभ ले चुके हैं और दोबारा इसी सुविधा की मांग कर रहे हैं।




