नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक के नतीजे आ गए हैं। 29 सितंबर से चली इस बैठक में रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया गया है। यानी अक्टूबर में भी लोन की ईएमआई पर कोई असर नहीं होगा और ब्याज दरें 5.5% पर स्थिर रहेंगी।
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बैठक के नतीजों का ऐलान करते हुए देशवासियों को दशहरा और गांधी जयंती की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने बताया कि भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है और पहली तिमाही में जीडीपी ग्रोथ रेट शानदार रहा। इसके साथ ही SDF रेट 5.25% और MSF रेट 5.75% पर यथावत रखे गए हैं। बैठक में MPC के सभी छह सदस्यों ने रेपो रेट को स्थिर रखने पर सहमति जताई।
जीडीपी ग्रोथ में बढ़ोतरी
RBI ने FY26 के लिए GDP ग्रोथ अनुमान को पहले 6.5% से बढ़ाकर 6.8% कर दिया है। घरेलू मांग में वृद्धि, लगातार बढ़ते निवेश और स्थिर आर्थिक माहौल को इसका आधार बताया गया है। दूसरी तिमाही (Q2) के लिए GDP ग्रोथ 6.7% से बढ़ाकर 7% की गई है। हालांकि, तीसरी तिमाही (Q3) के अनुमान में 6.6% से घटाकर 6.4% और चौथी तिमाही (Q4) में 6.3% से घटाकर 6.2% कर दिया गया है।
रेपो रेट में स्थिरता
इस साल 2025 में RBI द्वारा यह चौथी रेपो रेट की समीक्षा रही है। फरवरी, अप्रैल और जून में रेपो रेट को क्रमशः 6.50% से घटाकर 5.5% किया गया था। इस बैठक में 25 बेसिस पॉइंट की कटौती की संभावना जताई जा रही थी, लेकिन MPC ने इसे स्थिर रखने का फैसला किया।
रेपो रेट का महत्व
रेपो रेट वह दर है जिस पर RBI बैंकों को कर्ज देती है। रेपो रेट घटने पर बैंकों को सस्ता लोन मिलता है, जिससे होम लोन, ऑटो लोन और पर्सनल लोन लेने वाले ग्राहकों के लिए ब्याज दरें कम हो जाती हैं। वहीं, रेपो रेट बढ़ने पर बैंक ब्याज दरों में वृद्धि कर देते हैं। RBI का यह निर्णय न केवल मौजूदा आर्थिक स्थिरता को दर्शाता है बल्कि उपभोक्ताओं और निवेशकों के लिए भी राहत का संदेश है।




