नई दिल्ली। देश में आधार नंबर आज लगभग हर नागरिक के पास है। यह 12 अंकों की यूनिक आईडी भारत सरकार द्वारा भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) के माध्यम से जारी की जाती है। इस आईडी की मदद से किसी भी व्यक्ति की पहचान को डिजिटल तरीके से सत्यापित करना आसान हो जाता है। इसी प्रक्रिया को आधार ऑथेंटिकेशन कहा जाता है, जो अब कई सरकारी सेवाओं, बैंकों और निजी कंपनियों के लिए एक अनिवार्य प्रक्रिया बनती जा रही है।
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रेलवे टिकट बुकिंग के नियम में बदलाव
UIDAI की तकनीक का इस्तेमाल अब भारतीय रेलवे भी करने जा रहा है। 1 जुलाई 2025 से तत्काल टिकट बुक करने के लिए IRCTC अकाउंट को आधार से वेरिफाई करना अनिवार्य होगा। इससे टिकटों की डुप्लीकेसी और फर्जी बुकिंग पर रोक लगाने में मदद मिलेगी।
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क्या है आधार ऑथेंटिकेशन?
आधार ऑथेंटिकेशन एक प्रक्रिया है जिसमें UIDAI के सेंट्रल आइडेंटिटी डेटा रिपॉजिटरी (CIDR) को किसी व्यक्ति के आधार नंबर के साथ उसकी डेमोग्राफिक जानकारी (जैसे नाम, जन्मतिथि) या बायोमेट्रिक डेटा (जैसे फिंगरप्रिंट, आईरिश स्कैन) भेजा जाता है। इस डेटा को UIDAI द्वारा वेरिफाई किया जाता है और अगर जानकारी सही पाई जाती है तो ऑथेंटिकेशन सफल माना जाता है।
कैसे होता है यह प्रोसेस?
- ऑथेंटिकेशन एजेंसी या सर्विस प्रोवाइडर – जैसे बैंक, टेलीकॉम कंपनियां या रेलवे – उपयोगकर्ता से आधार से संबंधित जानकारी लेती हैं।
- ये डेटा UIDAI को भेजा जाता है।
- CIDR उस जानकारी की पुष्टि करता है और बायोमेट्रिक या OTP से सत्यापन कर प्रोसेस को पूरा करता है।
ऑथेंटिकेशन के तरीके
- बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन: फिंगरप्रिंट या फेस स्कैन के जरिए।
- OTP आधारित ऑथेंटिकेशन: आधार से लिंक मोबाइल नंबर पर भेजे गए OTP से वेरिफिकेशन।
- फेस ऑथेंटिकेशन: हाल ही में जोड़ा गया एक नया फीचर।
क्यों जरूरी है यह प्रक्रिया?
इससे फर्जीवाड़े, पहचान की चोरी और डुप्लीकेट दस्तावेजों से बचाव होता है। यही वजह है कि सरकारी योजनाओं, बैंकिंग सेवाओं और अब रेलवे टिकटिंग में भी आधार ऑथेंटिकेशन को अनिवार्य बनाया जा रहा है।




