रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय अपने दस दिवसीय जापान–दक्षिण कोरिया दौरे पर रवाना हो चुके हैं। एयरपोर्ट से साझा की गई तस्वीर में उनके साथ उनकी धर्मपत्नी भी नजर आईं। बस फिर क्या था—सियासी गलियारों और सोशल मीडिया में चर्चा शुरू हो गई कि यह प्रवास “औद्योगिक मिशन” है या “पारिवारिक वेकेशन”?
लेकिन मान लीजिए, इसे पारिवारिक दौरा कहना महज मूर्खता होगी। आखिर प्रदेश की औद्योगिक नीति में निवेश लाना केवल कागज़ और करारों से नहीं होता, उसके पीछे एक पूरा टीमवर्क चाहिए। और इस टीमवर्क में अगर मुख्यमंत्री की धर्मपत्नी भी साथ खड़ी हैं, तो इसे पर्यटन समझना गलत होगा।
सीएम ने खुद लिखा है—“छत्तीसगढ़ नई औद्योगिक नीति के साथ तेजी से औद्योगिक विकास और निवेश का केंद्र बन रहा है।” निवेशकों को भरोसा दिलाने के लिए मुख्यमंत्री का संकल्प और उनकी पत्नी का साथ, दोनों ही एक संदेश देते हैं—कि यह सरकार और यह नेतृत्व निजी और सार्वजनिक जीवन, दोनों को मिलाकर पूरे समर्पण से काम कर रहा है।
अब सवाल यह नहीं है कि पत्नी साथ गई हैं या नहीं, सवाल यह है कि क्या वे भी प्रदेश की ब्रांड एंबेसडर बन सकती हैं? क्योंकि दुनिया में कई जगह नेता की छवि उसके परिवार के साथ ही निवेशकों के बीच मजबूत होती है।
तो इस दौरे को पारिवारिक पिकनिक कहना आसान है, पर असल मायने में यह पारिवारिक भागीदारी से औद्योगिक नीति को मजबूत करने की कोशिश है।




