रायपुर. कांटा चुभने की सोच ही मन में सिहरन ले आती है, लेकिन आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि कांटों को कई बीमारियों को भी दूर करने में कारगर माना जाता है। आयुर्वेद से जुड़े डॉक्टर्स की मानें तो छत्तीसगढ़ में मिलने वाला कांटा किसी वरदान से कम नहीं है। ये आयुर्वेदिक दवाओं में लाभकारी साबित हो रहा है। आधा दर्जन से अधिक बीमारियों की दवा के लिए कांटे का उपयोग किया जा रहा है।
आयुर्वेद कॉलेज के प्रो. डॉ. रुपेंद्र चंद्राकर बताते हैं कि आयुर्वेद चिकित्सा में अनेक बीमारियों के उपचार में कांटे काम आते हैं। धमतरी के दूरस्त अंचलों में आज भी कई ऐसे पौधे मौजूद हैं जो कई असाध्य रोगों को दूर कर सकते हैं। मोखला कांटे का उपयोग शरीर की कमजोरी को दूर करने के लिए किया जाता है। इसे यौन क्षमता बढ़ाने में भी उपयोगी माना जाता है।
गोखरू कांटा किडनी की अचूक दवा
डॉ. चंद्राकर बताते हैं कि गोखरू कांटा यूं तो देश भर में पाया जाता है, लेकिन छत्तीसगढ़ में यह प्रचुर मात्रा में होता है। यह किडनी की अचूक दवा है। आयुर्वेद चिकित्सा में इसका उपयोग उपयोग किडनी के मरीजों के लिए किया जाता है। गोखरु पौधा अनेक बीमारियों के इलाज में कारगर है।
मुंहासे और बवासीर का इलाज
आयुर्वेद चिकित्सकों की मानें तो यहां के कांटों पर कई बड़ी कंपनियां निर्भर हैं। इसके लिए कंपनियां धमतरी से लगातार संपर्क बनाई हुई हैं। सालमली का कांटा मुंहासे को दूर करने में उपयुक्त माना जाता है। स्नूही पेड़ के कांटों का उपयोग बवासीर की बीमारी में किया जाता है।
धमतरी के दूरस्त अंचलों से निकलती हैं कई औषधियां
छत्तीसगढ़ वनांचल के साथ ही औषधीय प्रदेश भी है। यहां असाध्य बीमारियों के इलाज के लिए हजारों औषधियां निकलती है। डॉ. रूपेंद्र बताते हैं कि बस्तर समेत छत्तीसगढ़ के तमाम क्षेत्रों की औषधियों का गढ़ धमतरी है। यहां की औषधि से कई प्रोडक्ट तैयार किए जा रहे हैं।




