रायगढ़। छत्तीसगढ़ में पुलिस और उनके स्टेशनों को लेकर लोगों के मन में अच्छी छवि नहीं है। ऐसा इसलिए क्योंकि कम्युनिटी पुलिसिंग की राह में चलने का दावा करने वाली हमारी पुलिस कानून और वर्दी की आड़ में एक अलग दुकानदारी चलाती है। ये दुकानदारी भय की दुकानदारी है, और भय की दुकानदारी पूरे प्रदेश की कानून व्यवस्था को जकड़ कर रखा है।
ऐसी ही एक दुकानदारी का नमूना रायगढ़ जिले से सामने आया है। यहां घरघोड़ा थाना प्रभारी हर्षवर्धन सिंह बैस और उनके ही थाना में पदस्थ आरक्षक दिलीप साहू और प्रेम राठिया को रक्षित केंद्र, भेजा गया है। इसे लाइन अटैच भी कहा जाता है। यह कार्रवाई ऐसे ही भय की दुकानदारी चलाने की वजह से की गई है।
दरअसल, घरघोड़ा निवासी भूपदेव राठिया ने थाना प्रभारी हर्षवर्धन सिंह बैस, आरक्षक दिलीप साहू और प्रेम राठिया के खिलाफ पुलिस अधीक्षक से लिखित शिकायत की थी। इसमें पहले तो उस पर झूठा महुआ शराब बेचने का आरोप लगाया गया और फिर केस को कमजोर करने के एवज में डरा-धमकाकर तीनों ने पैसे लिए। इस पर उप पुलिस अधीक्षक (सायबर) ने शिकायत की जांच की और पुलिस अधीक्षक को रिपोर्ट प्रस्तुत किया था। रिपोर्ट में पुलिस अधीक्षक ने पाया कि तीनों पुलिसकर्मी अपने पदीय दायित्वों के विपरीत आचरण प्रदर्शित किया।
पुलिस अधीक्षक दिव्यांग पटेल ने तीनों पुलिसकर्मी को रक्षित केंद्र में भेजते हुए उप पुलिस अधीक्षक (सायबर) को प्राथमिक जांच के लिए निर्देशित किया है। इस मामले की जांच के बाद आगे की कार्यवाही की जाएगी।




