नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र के दौरान ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर लोकसभा और राज्यसभा में जोरदार बहस जारी है। लोकसभा में मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मुद्दे पर विस्तार से बयान दिया और इसे देश की सुरक्षा, सेना की वीरता और आतंक के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई का प्रतीक बताया।
प्रधानमंत्री मोदी ने लोकसभा में कहा, “ये विजयोत्सव आतंकी ठिकानों को मिट्टी में मिलाने का है, ये सिंदूर की सौगंध पूरा करने का विजयोत्सव है, ये सेना की शौर्य और सामर्थ्य का उत्सव है।” उन्होंने दो टूक कहा कि वे भारत का पक्ष रखने के लिए खड़े हुए हैं और जिन्हें भारत का पक्ष नहीं दिखता, उन्हें आईना दिखाने के लिए खड़े हैं।
पहलगाम हमले पर कड़ा जवाब
पीएम मोदी ने कहा कि, पहलगाम हमला भारत को हिंसा की आग में झोंकने का सुविचारित प्रयास था। इसके पीछे देश में दंगे फैलाने की गहरी साजिश थी। हमले के तुरंत बाद मैंने सुरक्षा एजेंसियों और सेना के साथ बैठक की, और उन्हें पूरी छूट दी गई कि वे तय करें कब, कहां और कैसे कार्रवाई करनी है।
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ऑपरेशन सिंदूर: सेना को खुली छूट
प्रधानमंत्री ने बताया कि सेना को यह अधिकार दिया गया कि वे आतंकियों के खिलाफ पूरी ताकत से कार्रवाई करें। उन्होंने कहा कि भारत ने आतंकियों को सजा दी और “ऐसी सजा दी कि आज भी उनके आकाओं की नींद उड़ी हुई है।
पाकिस्तान को दी गई चेतावनी
पीएम मोदी ने खुलासा किया कि अमेरिका के उप-राष्ट्रपति ने उनसे बात करने की कोशिश की थी और उन्हें चेतावनी दी थी कि पाकिस्तान हमला करने की तैयारी में है। इस पर प्रधानमंत्री ने सख्त लहजे में जवाब देते हुए कहा, अगर पाकिस्तान ने हमला किया तो उसे भारी कीमत चुकानी होगी। पाकिस्तान की गोली का जवाब भारत गोले से देगा।
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न्यूक्लियर ब्लैकमेलिंग पर भारत का प्रहार
प्रधानमंत्री ने पाकिस्तान की ‘न्यूक्लियर ब्लैकमेलिंग’ नीति को भी आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा, भारत ने सिद्ध कर दिया कि न्यूक्लियर ब्लैकमेलिंग अब नहीं चलेगी। भारत इसके आगे कभी नहीं झुकेगा। भारत ने अपनी तकनीकी और सैन्य क्षमता का प्रदर्शन कर पाकिस्तान को करारा जवाब दिया।
राज्यसभा में भी जारी है चर्चा
राज्यसभा में भी मंगलवार से इस मुद्दे पर चर्चा चल रही है। विपक्ष ने सरकार से ऑपरेशन सिंदूर के दायरे, रणनीति और इसके असर को लेकर कई सवाल किए हैं, जिनका जवाब देने के लिए सरकार तैयार है।




