रायपुर/बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के ‘गुरु घासीदास धाम’ जिले से जुड़ा एक बेहद अमानवीय मामला मंगलवार को बिलासपुर हाईकोर्ट की सख्ती के बाद न्याय के रास्ते पर आगे बढ़ा। पलारी ब्लॉक के लच्छनपुर मिडिल स्कूल में मासूम बच्चों को मध्यान्ह भोजन में कुत्तों का जूठा खाना परोसने के मामले में हाईकोर्ट ने बड़ा आदेश सुनाते हुए प्रभावित बच्चों को मुआवजा देने को कहा है।
मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति बीडी गुरु की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान घटना को बेहद गंभीर माना। अदालत के सामने रखे गए शपथपत्र में बताया गया कि स्कूल के प्रभारी प्रधानपाठक और एक शिक्षक को निलंबित कर दिया गया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बच्चों की सुरक्षा और सम्मान सर्वोच्च है, और किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
क्या है मामला
28 जुलाई को लच्छनपुर मिडिल स्कूल में रसोइयों द्वारा तैयार मध्यान्ह भोजन को एक आवारा कुत्ते ने जूठा कर दिया था। इसके बावजूद, रसोइयों और स्कूल प्रशासन ने बच्चों को वही खाना परोस दिया। घटना को छुपाने की कोशिश भी की गई। जब मामला सामने आया, तो 84 बच्चों को गुपचुप तरीके से एंटी-रेबीज इंजेक्शन लगवाए गए।
जांच रिपोर्ट में यह साफ हुआ कि घटना को दबाने की कोशिश की गई और बच्चों की जिंदगी से खिलवाड़ हुआ। जिला कलेक्टर की रिपोर्ट के आधार पर प्रभारी प्रधानपाठक नेतराम गिरि और शिक्षक एलबी वेदप्रकाश पटेल को प्रथम दृष्टया दोषी पाया गया।
बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि
हाईकोर्ट का यह फैसला सिर्फ मुआवजा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संदेश भी देता है कि बच्चों के स्वास्थ्य और गरिमा से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। अब पूरा प्रदेश उम्मीद लगाए बैठा है कि इस घटना से सबक लेते हुए स्कूलों में मध्यान्ह भोजन की निगरानी और गुणवत्ता पर और सख्ती बरती जाएगी।




