रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का दस दिवसीय जापान और दक्षिण कोरिया प्रवास आज समाप्त हो रहा है। कल वे रायपुर लौट आएंगे। यात्रा के दौरान उन्होंने दोनों देशों की शीर्ष औद्योगिक संस्थाओं और कंपनियों से मुलाकात कर छत्तीसगढ़ में निवेश की संभावनाओं को पेश किया।
टोक्यो और ओसाका में JETRO, NTT और SAS Sanwa जैसी कंपनियों से मुलाकात हुई। ओसाका वर्ल्ड एक्सपो 2025 में छत्तीसगढ़ पवेलियन का शुभारंभ हुआ, जहाँ पहले ही दिन 22 हजार से अधिक लोग पहुंचे। वहीं, सियोल में KITA और ATCA जैसी बड़ी औद्योगिक संस्थाओं से संवाद हुआ और “छत्तीसगढ़ इन्वेस्टर-कनेक्ट” कार्यक्रम के जरिये कोरियाई निवेशकों के साथ सीधी चर्चा की गई।
सरकार की उपलब्धियों की गिनती

सरकार का दावा है कि इस यात्रा से छत्तीसगढ़ की पहचान केवल “खनिज राज्य” तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि राज्य को इलेक्ट्रॉनिक्स, फूड प्रोसेसिंग और टेक्नोलॉजी सेक्टर में निवेश गंतव्य के रूप में प्रचारित किया गया।
- निवेश का रोडमैप: छत्तीसगढ़ इंडस्ट्रियल पॉलिसी 2024–30 को अंतरराष्ट्रीय मंच पर रखा गया।
- कृषि व मूल्य संवर्धन: जापानी कंपनियों को कृषि–आधारित फूड प्रोसेसिंग प्रोजेक्ट्स में आमंत्रण मिला।
- रोजगार की संभावना: सरकार का दावा है कि प्रस्तावित निवेश से हजारों युवाओं को नए रोजगार मिल सकते हैं।
- वैश्विक पहचान: ओसाका एक्सपो में छत्तीसगढ़ पवेलियन को मिली जबरदस्त भीड़ को सरकार “ब्रांड छत्तीसगढ़” की कामयाबी मान रही है।
क्या मिला, क्या बाकी?

यात्रा से छत्तीसगढ़ को तत्काल कोई बड़ा MoU या निवेश घोषणा तो नहीं मिली, लेकिन दरवाजे खुल गए। SAS Sanwa को फूड प्रोसेसिंग और इलेक्ट्रॉनिक्स प्रोजेक्ट्स में आमंत्रण मिला है। साथ ही, जापान और कोरिया की बड़ी कंपनियों के सामने छत्तीसगढ़ की इंडस्ट्रियल पॉलिसी 2024–30 को पेश किया गया।
कृषि से जुड़े वैल्यू एडिशन, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर जैसे क्षेत्रों में छत्तीसगढ़ के लिए नए मौके बनते दिख रहे हैं। अगर ये प्रस्ताव जमीन पर उतरते हैं, तो रोजगार, कोल्ड-चेन इंफ्रास्ट्रक्चर और टेक्नोलॉजी स्किलिंग के क्षेत्र में बड़ा फायदा हो सकता है।
जनता की उम्मीदें

लोगों में उम्मीद है कि यह दौरा सिर्फ फोटो-ऑप और औपचारिक बैठकों तक सीमित न रहे। राज्य के युवा रोजगार की तलाश में हैं और उद्योग जगत खनिज से परे नए अवसर चाहता है। किसानों को भरोसा है कि फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री से उनकी फसल का सही मूल्य मिलेगा। वहीं शहरी वर्ग चाहता है कि इलेक्ट्रॉनिक्स और टेक सेक्टर के आने से राज्य की छवि बदले और नए अवसर पैदा हों।
विपक्ष की प्रतिक्रिया
कांग्रेस ने इस दौरे को “सरकारी पर्यटन” बताया और कहा कि “अभी तक कोई ठोस निवेश समझौता सामने नहीं आया है।” विपक्ष का तर्क है कि केवल अंतरराष्ट्रीय यात्राओं से विकास नहीं होता, बल्कि राज्य में आधारभूत संरचना और नीति स्थिरता पर काम होना चाहिए।
संपादकीय नज़र
इस दौरे की अहमियत को केवल “MoU साइनिंग” से नहीं मापा जा सकता। यह दौरा एक तरह से रिलेशन बिल्डिंग और निवेश की तैयारी का चरण है। मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ को एशिया-प्रशांत निवेश मानचित्र पर रखने की कोशिश की है। लेकिन अब असली परीक्षा यह होगी कि सरकार इन मुलाकातों को ठोस प्रोजेक्ट्स में कैसे बदले।
छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था अब तक खनिज और स्टील पर टिकी रही है। यदि जापान और कोरिया से तकनीक और निवेश आता है तो यह राज्य के लिए आर्थिक विविधीकरण का रास्ता खोलेगा। जनता की नजर अब अगले छह–बारह महीनों पर रहेगी—क्या विदेशी कंपनियाँ वास्तव में यहां जमीन पर प्रोजेक्ट शुरू करती हैं, या यह यात्रा केवल कूटनीतिक पहल बनकर रह जाती है।




