दिल्ली। पटियाला हाउस कोर्ट ने निजी कॉलेज की छात्राओं से अश्लील हरकत करने के आरोप में गिरफ्तार चैतन्यानंद सरस्वती की न्यायिक हिरासत 14 दिनों के लिए बढ़ा दी है। शुक्रवार को पिछली हिरासत की अवधि समाप्त होने पर पुलिस ने उसे अदालत में पेश किया, जहां ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट अनिमेष कुमार ने आदेश जारी किया। अब आरोपी को 14 नवंबर को दोबारा कोर्ट में पेश किया जाएगा। वहीं उसकी जमानत याचिका पर सुनवाई 7 नवंबर को सेशंस कोर्ट में होगी।
इससे पहले 3 अक्टूबर को चैतन्यानंद को पहली बार 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। बाद में 17 अक्टूबर को उसकी हिरासत बढ़ाकर 31 अक्टूबर तक की गई थी। अब तीसरी बार उसकी न्यायिक हिरासत बढ़ाई गई है। इस दौरान 27 अक्टूबर को एडिशनल सेशंस जज दीप्ति देवेश ने दिल्ली पुलिस से जांच की अद्यतन रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए थे। पुलिस ने कोर्ट को बताया कि 16 पीड़िताओं में से 9 का परीक्षण पूरा हो चुका है, जबकि बाकी छात्राएं दिल्ली से बाहर होने के कारण उनके बयान और मेडिकल परीक्षण अभी लंबित हैं।
पुलिस ने बताया—आरोपी के खिलाफ गंभीर सबूत मिले
दिल्ली पुलिस ने अदालत में कहा कि जांच के दौरान चैतन्यानंद सरस्वती के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य मिले हैं। इनमें आपत्तिजनक चैट, स्क्रीनशॉट, और अश्लील तस्वीरें शामिल हैं। वहीं बचाव पक्ष के वकील ने दावा किया कि आरोपी के खिलाफ कोई ठोस प्रमाण नहीं है और उसे साजिश के तहत फंसाया गया है। पुलिस ने इन दलीलों का खंडन करते हुए कहा कि उपलब्ध साक्ष्य स्पष्ट और ठोस हैं।
चैतन्यानंद सरस्वती को हाल ही में आगरा से गिरफ्तार किया गया था। उन पर आरोप है कि वे एक निजी कॉलेज में पढ़ने वाली आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की छात्राओं के साथ अनुचित व्यवहार करते थे। साथ ही कॉलेज की संपत्ति और संसाधनों के दुरुपयोग के आरोप भी लगाए गए हैं।
सीसीटीवी और वित्तीय गड़बड़ियों में भी जांच
पुलिस के अनुसार, आरोपी के पास कॉलेज के सीसीटीवी सिस्टम का पूरा एक्सेस था। उसने वॉशरूम और अन्य संवेदनशील स्थानों पर कैमरे लगवाकर छात्राओं की निगरानी की। जांच में कॉलेज से जुड़े वित्तीय लेनदेन में अनियमितताओं की भी जानकारी सामने आई है। पुलिस ने उसके कब्जे से एक बीएमडब्ल्यू कार जब्त की है, जिसे निजी उपयोग के लिए संदिग्ध तरीके से खरीदा गया बताया जा रहा है।
कौन है चैतन्यानंद सरस्वती
मूल रूप से ओड़िशा के निवासी चैतन्यानंद सरस्वती खुद को आध्यात्मिक गुरु बताते थे और पार्ट सारथि या डॉ. पार्थ सारथि के नाम से भी जाने जाते हैं। वे लंबे समय से एक निजी शैक्षणिक संस्थान से जुड़े हुए थे। लेकिन छात्राओं द्वारा लगाए गए यौन उत्पीड़न और अनुचित व्यवहार के गंभीर आरोपों के बाद श्रृंगेरी शारदा पीठ ने उन्हें सभी पदों और जिम्मेदारियों से हटा दिया है।




