पटना। बिहार विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण में जनता दल यूनाइटेड की नौ महिला प्रत्याशियों का राजनीतिक भविष्य तय होगा। इनमें दो कैबिनेट मंत्री तीन मौजूदा विधायक तथा दो नवोदित चेहरे शामिल हैं। एक प्रत्याशी दल बदलकर जदयू में आई हैं जबकि एक पर पार्टी ने दोबारा भरोसा जताया है।
मंत्रियों की प्रतिष्ठा दांव पर
दो महिला मंत्रियों की साख दांव पर लगी है। धमदाहा से लेशी सिंह लगातार कई चुनावों से इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रही हैं तथा जदयू ने उन्हें पुनः टिकट दिया है। फुलपरास से शीला मंडल वर्ष 2020 में पहली बार जीतकर मंत्री बनीं थीं तथा इस बार भी पार्टी ने उन पर दांव खेला है।
सीट बचाने की चुनौती
तीन मौजूदा विधायक अपनी सीट बरकरार रखने के लिए संघर्ष कर रही हैं। केसरिया से शालिनी मिश्रा दूसरी बार मैदान में हैं। बाबूबरही से मीना कामत भी दूसरी बार चुनाव लड़ रही हैं जहां पूर्व में उनके परिवार का दबदबा रहा है। बेलागंज से मनोरमा देवी उपचुनाव में जीतकर विधायक बनीं थीं तथा पूर्व में यह सीट राजद के सुरेंद्र यादव का गढ़ रही है।
पहली बार मैदान में उतरीं दो नेता
शिवहर से श्वेता गुप्ता तथा त्रिवेणीगंज सुरक्षित से सोनम रानी सरदार पहली बार जदयू के टिकट पर चुनाव मैदान में हैं। दोनों नवोदित प्रत्याशी पार्टी के लिए नई उम्मीद जगाती हैं।
दल बदलकर आईं विभा देवी
नवादा से विभा देवी वर्ष 2020 में राजद के टिकट पर जीतीं थीं। इस बार वे जदयू के उम्मीदवार हैं। उनके पति राजवल्लभ यादव भी इस सीट से पूर्व विधायक रह चुके हैं।
शगुफ्ता अजीज पर दोबारा भरोसा
अररिया से शगुफ्ता अजीम को जदयू ने पुनः मौका दिया है। वर्ष 2020 में वे इसी सीट से चुनाव हार गईं थीं लेकिन पार्टी ने उन पर फिर विश्वास जताया है।
दूसरे चरण के मतदान में इन नौ महिला प्रत्याशियों की जीत हार से जदयू की महिला सशक्तिकरण नीति की मजबूती का आकलन होगा।




