राजनांदगांव। कटघोरा-मुंगेली-कवर्धा-डोंगरगढ़ नई रेल लाइन परियोजना पिछले कई वर्षों से ठप पड़ी है। हर चुनाव में मुद्दा बनने के बावजूद परियोजना में कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है। इससे क्षेत्र में औद्योगिक निवेश रुका हुआ है, माल ढुलाई लागत दोगुनी बनी हुई है, युवाओं को रोजगार के अवसर नहीं मिल रहे और पर्यटन स्थलों की पहुंच कठिन होने से संभावित आय भी प्रभावित हो रही है।
यह परियोजना भाजपा शासन में शुरू हुई थी। कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में भी आगे नहीं बढ़ी और वर्तमान भाजपा सरकार में भी गति नहीं आई। स्थानीय लोग इसे भूल चुकी परियोजना मान रहे हैं।
रेल बजट 2025-26 में छत्तीसगढ़ के लिए 6,925 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, लेकिन कटघोरा-मुंगेली-कवर्धा-डोंगरगढ़ रेल लाइन का कहीं कोई उल्लेख नहीं है। रायपुर और बिलासपुर जोन के अधिकारियों ने भी परियोजना की स्थिति पर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी। बिलासपुर जोन के निर्माण विभाग सूत्रों का कहना है कि अब तक कोई आधिकारिक निर्देश प्राप्त नहीं हुए हैं।
पिछले सात वर्षों में केवल सर्वे, डीपीआर, भूमि चिन्हांकन और कागजी प्रक्रिया ही पूरी हुई है। जमीन अधिग्रहण में विवाद, मुआवजा असहमति, राजनीतिक बदलाव और विभागीय समन्वय की कमी के कारण वास्तविक कार्य शुरू नहीं हो सका। क्षेत्रवासियों में निराशा है कि परियोजना कहीं स्थायी रूप से बंद न कर दी जाए।




