रायगढ़। राज्य सरकार द्वारा संपत्तियों के बाजार मूल्य निर्धारण से संबंधित नई गाइडलाइन दरें लागू कर दी गई हैं। इन नई दरों के तहत नगरीय क्षेत्रों में भूमि की दरों में चली आ रही विसंगतियों को दूर करते हुए उन्हें एकरूप किया गया है। अलग-अलग दरों की जटिल कंडिकाओं को घटाकर सरल बनाया गया है। इसी प्रकार ग्रामीण क्षेत्रों में भी लंबे समय से एक ही मुख्य मार्ग से लगे गांवों के बीच भूमि दरों में भारी अंतर था, जिसे नई गाइडलाइन दरों में तार्किक रूप से समाप्त कर समान किया गया है।
जिला पंजीयक रायगढ़ ने बताया कि जिले के उप पंजीयक कार्यालयों की गाइडलाइन दरों में किए गए जनहितैषी सुधारों में ग्रामीण क्षेत्रों की डायवर्सन भूमि के बाजार मूल्य की गणना से जुड़ा निर्णय अत्यंत महत्वपूर्ण है। पूर्व में प्रचलित व्यवस्था के अनुसार ग्रामीण क्षेत्र में परिवर्तित भूमि के विक्रय पर निर्धारित बाजार मूल्य का 2.5 गुना कर बाजार मूल्य की गणना की जाती थी। इससे आम नागरिकों को अधिक स्टाम्प ड्यूटी और पंजीयन शुल्क का भुगतान करना पड़ता था। वर्तमान गाइडलाइन उपबंधों में 26 सितंबर 2025 से इस व्यवस्था को पूर्णतः विलोपित कर दिया गया है और छत्तीसगढ़ शासन ने ग्रामीण क्षेत्रों में परिवर्तित भूमि के बाजार मूल्य की गणना सीधे हेक्टेयर दर पर करने का निर्णय लिया है।
इस संशोधन के बाद आम जनता को स्टाम्प ड्यूटी और पंजीयन शुल्क के भुगतान में उल्लेखनीय राहत मिल रही है। इसका प्रत्यक्ष उदाहरण उप पंजीयक कार्यालय सारंगढ़ के ग्राम टिमरलगा, पटवारी हल्का नंबर 42 का है, जहां कुल 5.98 एकड़ परिवर्तित भूमि के बाजार मूल्य की गणना हेक्टेयर दर पर की गई। इस आधार पर 84 लाख रुपये के बाजार मूल्य पर पंजीयन दस्तावेज प्रस्तुत किया गया, जिसमें स्टाम्प ड्यूटी और पंजीयन शुल्क के रूप में कुल 8.90 लाख रुपये जमा कर पंजीयन कराया गया।
यदि पूर्व प्रचलित गाइडलाइन उपबंध के अनुसार 2.5 गुना गणना की जाती, तो बाजार मूल्य लगभग 2.10 करोड़ रुपये होता और संबंधित पक्षकार को स्टाम्प ड्यूटी व पंजीयन शुल्क के रूप में लगभग 22.26 लाख रुपये का भुगतान करना पड़ता। इस प्रकार शासन द्वारा पुराने उपबंध को समाप्त किए जाने से पक्षकार को 13.36 लाख रुपये की सीधी बचत हुई, जो आम जनता के लिए एक बड़ी आर्थिक राहत है।
नई गाइडलाइन दरों में किए गए इन जनहितैषी सुधारों से ग्रामीण क्षेत्रों में परिवर्तित भूमि के विक्रय पर पंजीयन और स्टाम्प शुल्क में उल्लेखनीय कमी आई है। इसके परिणामस्वरूप आम नागरिकों को हजारों से लेकर लाखों रुपये तक की प्रत्यक्ष आर्थिक राहत मिल रही है। यह सुधार न केवल नागरिकों के आर्थिक भार को कम करता है, बल्कि पारदर्शी और सुगम पंजीयन व्यवस्था की दिशा में शासन की प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है। संशोधित दरों से भूमि क्रय-विक्रय की प्रक्रिया अधिक सरल, सुलभ और जनहित उन्मुख हुई है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी प्रत्यक्ष लाभ मिल रहा है।




