बलौदाबाजार। राज्य सरकार ने किसानों की आर्थिक समृद्धि को ध्यान में रखते हुए आयल पाम की खेती को प्रोत्साहित करने का बड़ा निर्णय लिया है। इसके तहत आयल पाम की खेती करने वाले किसानों को केंद्र और राज्य सरकार के अनुदान के अतिरिक्त राज्य सरकार द्वारा टॉपअप के रूप में अतिरिक्त सहायता दी जाएगी।
यह अनुदान रखरखाव, अंतरवर्तीय फसल, ड्रिप सिंचाई और फेंसिंग के लिए प्रदान किया जाएगा। सरकार के इस नीतिगत फैसले से आयल पाम की खेती के प्रति किसानों का रुझान बढ़ रहा है, जिससे उन्हें दीर्घकालीन आर्थिक लाभ मिलने की संभावना है।
उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों के अनुसार, केंद्र सरकार की अनुदान राशि के अलावा राज्य सरकार 69,620 रुपये प्रति हेक्टेयर का अतिरिक्त टॉपअप अनुदान देगी। इसमें रखरखाव के लिए पूर्व में मिल रहे 5,250 रुपये के अतिरिक्त 1,500 रुपये प्रति हेक्टेयर, अंतरवर्तीय फसल के लिए 5,250 रुपये के साथ 5,000 रुपये प्रति हेक्टेयर तथा ड्रिप सिंचाई पर 14,130 रुपये के अतिरिक्त 8,635 रुपये प्रति हेक्टेयर का टॉपअप शामिल है। इसके अलावा पहली बार फेंसिंग के लिए 54,485 रुपये प्रति हेक्टेयर का अनुदान भी दिया जाएगा।
आयल पाम एक दीर्घकालीन फसल है, जिसमें रोपण के चौथे वर्ष से उत्पादन शुरू हो जाता है और लगभग 30 वर्षों तक निरंतर आय प्राप्त होती है। पारंपरिक तिलहनी फसलों की तुलना में इसकी तेल उत्पादन क्षमता 4 से 6 गुना अधिक है। अधिक जानकारी के लिए किसान शेखर जायसवाल के मोबाइल नंबर 8103998548 पर संपर्क कर सकते हैं।




