रायगढ़। जिले में खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के तहत धान खरीदी कार्य में पारदर्शिता और शासन के निर्देशों के कड़ाई से पालन को सुनिश्चित करने के लिए जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। विभिन्न धान उपार्जन केंद्रों के निरीक्षण और जांच में गंभीर अनियमितताएं सामने आने के बाद कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी के अनुमोदन से दोषी समिति प्रबंधकों और सहायकों के विरुद्ध कड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की गई है। इस कार्रवाई के तहत तीन अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है, जबकि दो सहायक समिति प्रबंधकों का वित्तीय प्रभार समाप्त कर दिया गया है।
सहकारिता विभाग द्वारा की गई विस्तृत जांच में यह स्पष्ट हुआ कि कई धान खरीदी केंद्रों में शासन द्वारा निर्धारित ढाला पद्धति से धान परीक्षण की प्रक्रिया का पालन नहीं किया जा रहा था। किसानों द्वारा बोरे में लाए गए धान को बिना गुणवत्ता परीक्षण के सीधे शासकीय बोरों में भरकर तौल किया जा रहा था, जो शासन के स्पष्ट निर्देशों का उल्लंघन है। इससे न केवल धान की गुणवत्ता प्रभावित हो रही थी, बल्कि पूरी खरीदी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े हो रहे थे। जांच में धान खरीदी कार्य में लापरवाही, उदासीनता और मनमाने ढंग से कार्य करने जैसे गंभीर तथ्य भी सामने आए।
उप आयुक्त सहकारिता विभाग ने बताया कि आदिम जाति सेवा सहकारी समिति मर्यादित जमरगीडी के सहायक समिति प्रबंधक एवं धान खरीदी प्रभारी दीनबंधु पटेल द्वारा बार-बार शासन निर्देशों की अनदेखी की जा रही थी। कारण बताओ सूचना पत्र के जवाब को असंतोषजनक पाए जाने पर उनका वित्तीय प्रभार तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दिया गया। इसी प्रकार आदिम जाति सेवा सहकारी समिति मर्यादित कापू के सहायक समिति प्रबंधक श्यामनारायण दुबे द्वारा भी धान खरीदी में लापरवाही बरती गई। उनके स्पष्टीकरण को भी संतोषजनक नहीं मानते हुए उनका वित्तीय प्रभार समाप्त किया गया।
जांच में गंभीर लापरवाही पाए जाने पर आदिम जाति सेवा सहकारी समिति मर्यादित छाल के सहायक समिति प्रबंधक ठंडाराम बेहरा तथा आदिम जाति सेवा सहकारी समिति मर्यादित कोड़ासिया के समिति प्रबंधक एवं फड़ प्रभारी प्रहलाद बेहरा को कारण बताओ सूचना पत्र का जवाब प्रस्तुत नहीं करने के कारण निलंबित कर दिया गया है। इसके अलावा आदिम जाति सेवा सहकारी समिति मर्यादित खड़गांव में धान उपार्जन केंद्र के नोडल अधिकारी के विरुद्ध गाली-गलौच और धमकी देने की शिकायत जांच में सही पाई गई। वहीं इसी समिति के सहायक समिति प्रबंधक कृपाराम राठिया द्वारा भी धान खरीदी में गंभीर लापरवाही सामने आने पर उन्हें भी तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है।
गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ राजपत्र के प्रावधानों के अनुसार 15 नवंबर 2025 से 31 जनवरी 2026 तक की धान खरीदी अवधि के दौरान धान उपार्जन कार्य से जुड़े सभी कर्मचारियों पर आवश्यक सेवा संधारण एवं विच्छिन्नता निवारण अधिनियम 1979 लागू है। इसके बावजूद लापरवाही सामने आना प्रशासन ने गंभीर माना है। जिला प्रशासन ने सभी समितियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि धान खरीदी कार्य पूरी पारदर्शिता, निर्धारित नियमों और शासन द्वारा तय प्रक्रिया के अनुसार ही किया जाए। प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि किसानों को किसी प्रकार की असुविधा नहीं होनी चाहिए और भविष्य में अनियमितता पाए जाने पर और भी कठोर कार्रवाई की जाएगी।




