गरियाबंद। राजस्व विभाग की लापरवाही और सिस्टम की सुस्ती का एक और मामला सामने आया है, जहां एक किसान तीन साल से अपने ही पैतृक कृषि भूमि के नक्शा सुधार के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहा है। तहसील कार्यालय छुरा, एसडीएम कार्यालय और कलेक्टर कार्यालय में आवेदन देने के बाद भी आज तक एक छोटी सी बंदोबस्ती त्रुटि सुधारी नहीं जा सकी। हालात से परेशान होकर किसान ने गुरुवार को मुख्यमंत्री जनदर्शन और राजस्व मंत्री के समक्ष गुहार लगाई है।
मामला तहसील छुरा अंतर्गत ग्राम रजनकटा, पटवारी हल्का नंबर 17 का है। किसान की पैतृक कृषि भूमि पाण्डुका और रजनकटा के बीच मुख्य सड़क से लगी हुई है, जिस पर वह वर्षों से काबिज है और काश्तकारी कर रहा है। इसके बावजूद रिकॉर्ड में दर्ज एक मामूली त्रुटि उसके लिए बड़ी मुसीबत बन गई है। किसान का आरोप है कि बीते कुछ वर्षों से जमीन दलालों की गिद्ध नजर इस जमीन पर लगी हुई है और आसपास की जमीन खरीदकर उसे हड़पने की कोशिशें की जा रही हैं।
सबसे हैरानी की बात यह है कि पटवारी और राजस्व निरीक्षक द्वारा मौके पर जांच कर पंचनामा और प्रतिवेदन तैयार कर नक्शा सुधार की अनुशंसा भी की जा चुकी है। इसके बाद भी फाइलें तहसील, एसडीएम और कलेक्टर कार्यालय के बीच घूमती रहीं। जहां आवेदन लगाया जाता है, वहां से “उच्च कार्यालय भेज दिया गया” कहकर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया जाता है। नायब तहसीलदार से लेकर तहसीलदार और एसडीएम तक, कोई भी अधिकारी निर्णय लेने को तैयार नहीं दिख रहा।
पीड़ित किसान का कहना है कि तीन साल में दफ्तरों के इतने चक्कर लग चुके हैं कि चप्पल घिस गई, लेकिन न्याय अब तक नसीब नहीं हुआ। राजस्व विभाग के इस रवैये से यह सवाल खड़ा हो रहा है कि जब पढ़ा-लिखा व्यक्ति भी सिस्टम में उलझकर थक जाए, तो ग्रामीण और कम शिक्षित किसानों का क्या होगा।
नक्शा दुरुस्त न होने का सीधा फायदा जमीन दलाल उठा रहे हैं, जो विवाद खड़ा कर जमीन हथियाने के हथकंडे अपना रहे हैं। किसान परिवार अपने हक की जमीन बचाने के लिए आवेदन पर आवेदन लगा रहा है, लेकिन सरकारी मशीनरी की बेरुखी उसके हौसले तोड़ रही है।
थक-हारकर अब किसान ने मुख्यमंत्री जनदर्शन में आवेदन देकर अंतिम उम्मीद लगाई है। सवाल यह है कि क्या राजधानी तक आवाज पहुंचने के बाद सिस्टम जागेगा, या फिर यह फाइल भी बाकी फाइलों की तरह किसी टेबल के नीचे दबकर रह जाएगी। अपने पैतृक हक के लिए संघर्ष कर रहे इस किसान परिवार को न्याय कब मिलेगा, इसका जवाब फिलहाल किसी के पास नहीं है।





