बलरामपुर। जिले के कुसमी विकासखंड अंतर्गत कमलापुर गांव में ईंट भट्ठे पर हुए हादसे ने एक बार फिर बालश्रम और बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ट्रैक्टर पलटने से तीन नाबालिग मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। घटना ऐसे समय सामने आई है, जब राज्य सरकार हाल ही में “बाल सक्षम नीति 2022” के तहत सड़क, भिक्षावृत्ति, बालश्रम और जोखिम भरे कार्यों में लगे बच्चों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाने की घोषणा कर चुकी है।
जानकारी के अनुसार हादसा उस समय हुआ, जब ईंट भट्ठे में काम कर रहे 11 से 12 वर्ष उम्र के तीन बच्चे ट्रैक्टर के जरिए मजदूरी कर रहे थे। इसी दौरान ट्रैक्टर अचानक अनियंत्रित होकर पलट गया और तीनों बच्चे उसके नीचे दब गए। घटना के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई। आसपास मौजूद मजदूरों और ग्रामीणों ने तत्काल राहत कार्य शुरू कर किसी तरह बच्चों को बाहर निकाला।
गंभीर रूप से घायल बच्चों को पहले कुसमी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने उन्हें बेहतर इलाज के लिए अंबिकापुर जिला अस्पताल रेफर कर दिया। अस्पताल सूत्रों के अनुसार बच्चों की हालत गंभीर बनी हुई है और उन पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।
इस घटना के बाद स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि क्षेत्र के कई ईंट भट्ठों में लंबे समय से नाबालिग बच्चों से मजदूरी कराई जा रही है, जबकि यह कानूनन अपराध है। लोगों का कहना है कि बच्चों से खतरनाक परिस्थितियों में काम लिया जाता है, लेकिन प्रशासनिक निगरानी लगभग नदारद है।
घटना ने राज्य सरकार की “बाल सक्षम नीति 2022” की जमीनी स्थिति पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। नीति के तहत ऐसे बच्चों की पहचान कर उन्हें शिक्षा, संरक्षण और पुनर्वास से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार ने हाल ही में जून महीने में विशेष अभियान चलाकर बालश्रम और सड़क जैसी परिस्थितियों में रह रहे बच्चों को मुख्यधारा में लाने की घोषणा भी की है। इसके बावजूद ईंट भट्ठों में नाबालिग बच्चों के काम करने की घटना सामने आना व्यवस्था की गंभीर विफलता माना जा रहा है।
स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि बाल सक्षम नीति का प्रभावी क्रियान्वयन और नियमित निरीक्षण होता, तो मासूम बच्चों को ट्रैक्टर और ईंट भट्ठों जैसे जोखिम भरे कामों में नहीं लगाया जाता।
घटना के बाद प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है। संबंधित ईंट भट्ठा संचालकों, श्रमिक व्यवस्था और बालश्रम से जुड़े पहलुओं की जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच के आधार पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
यह हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि उस कड़वी सच्चाई की तस्वीर भी है, जहां कई बच्चे अब भी किताबों की जगह मजदूरी और बचपन की जगह खतरे से भरी जिंदगी जीने को मजबूर हैं।




